अपने ही मैदान में कमज़ोर होती भारतीय टीम, सवाल तो उठेंगे ही

न्‍यूज़ीलैंड ने आख़‍िरकार भारत में आकर वो कारनामा कर डाला, जिसे करने की इच्‍छा बाक़ी टीमें भी रखती आई हैं। इससे पहले 0-3 से टेस्‍ट मैच और अब 1-2 से वनडे सीरीज़ जीतकर न्‍यूज़ीलैंड ने बता दिया, कि उन्‍हें आईसीसी जैसे बड़े टूर्नामेंट में क्‍यों फ़ेवरेट माना जाता रहा है।

बड़े खिलाड़ियों के बिना भी हावी रही न्‍यूज़ीलैंड

न्‍यूज़ीलैंड की टीम वनडे सीरीज़ के लिए नए चेहरों के साथ भारत आई थी, लेकिन भारत में भारत का मुक़ाबला शानदार तरीक़े से किया। भारत अपनी पूरे अनुभव के साथ मैदान में उतरी, लेकिन अनुभवहीन न्‍यूज़ीलैंड के सामने टिक नहीं सकी। गेंदबाजी हो या बल्‍लेबाजी दोनों पहलुओं में न्‍य़ूज़ीलैंड, भारत से कहीं आगे रही। कहीं से भी नहीं लगा, कि ज़्यादातर नए खिलाड़ी भारत में पहली बार खेल रहे हैं।  

टेस्‍ट में भी किया था क्‍लिनस्‍वीप

साल 2024 में टेस्‍ट सीरीज़ खेलने आई न्‍यूज़ीलैंड को शायद भारतीय टीम ने हल्‍का समझने की भूल की थी, जिसके बाद न्‍यूज़ीलैंड ने जो किया वो किसी ने सोचा नहीं होगा। तीन टेस्‍ट मैच की सीरीज़ को क्‍लीनस्‍वीप से जीतना सपने जैसे ही था। इसके बाद भारत की कमजोरी भी सबके सामने उजागर हुई, जिसके बाद दूसरी टीमों के अंदर यह विश्‍वास जागा, कि भारत को हम भी भारत में हरा सकते हैं। इसका सही प्रमाण साउथ अफ्रीका के साथ हुई टेस्‍ट सीरीज़ में देखने को मिला, जहां साउथ अफ्रीका ने भी भारत में भारत को 0-2 से हरा दिया। इन दोनों टेस्‍ट सीरीज़ में देखा गया, कि भारत को 100 का आंकड़ा छूने में काफ़ी मुश्‍क़‍िल हुई और स्‍पीन खेलने में महारत हासिल करने वाली भारतीय टीम स्‍पीन के सामने जूझती रही और दूसरी टीम के बल्‍लेबाज भारतीय स्‍पीन को बाउंड्री के पार भेजते रहे। घर पर लगातार मिल रही हार के साथ ही कप्‍तान, टीम चयन और कोच गौतम गंभरी पर सवाल उठने लगे हैं। आगे इन हार से टीम प्रबंधन क्‍या सीख लेती है ये तो आने वाला समय ही बताएगा।   

219 रन की साझेदारी बनी निर्णायक

टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने उतरी टीम इंडिया का फ़ैसला सही साबित हुआ और 5 रन पर ही न्‍यूज़ीलैंड के दोनों ओपनर पवेलियन लौट गए। उसके बाद इस सीरीज़ में अपनी बल्‍लेबाजी से भारतीय गेंदबाजों के पसीने छुड़ाने वाले डैरेल मिचेल ने पहले विल यंग के साथ शुरुआती झटकों से उभरते हुए 50 रन की साझेदारी की और विल यंग के आउट होने के बाद ग्‍लेन फ़‍िलिप्‍स के साथ चौथे विकेट के लिए 219 रन जड़ दिए। डैरेल मिचेल ने इस सीरीज़ का दूसरा शतक लगाते हुए 137 रन बनाए, वहीं फ़‍िलिप्‍स ने 106 रन की शानदार पारी खेली और भारत के सामने 338 रन का विशाल लक्ष्‍य रखा, जिसे भारत दूर रह गया।

गेंदबाजी रही विफ़ल

भारत में भारतीय गेंदबाजों का सामना करना आसान नहीं होता था और 250 रन का लक्ष्‍य भी विपक्षी टीम को भारी लगता था। लेकिन अब हालात ऐसे हैं, कि 350 का लक्ष्‍य भी जीत की गैरेंटी नहीं, क्‍योंकि अब गेंदबाजी पहले जैसी नहीं और स्‍पीन का जादू फ़ीका पड़ गया है। अब विदेशी टीम आसानी से भारतीय गेदबाजों का सामना करने लगी हैं। यही हाल इसी सीरीज़ में देखने को मिला, जहां न्‍यूज़ीलैंड के बल्‍लेबाज पूरी सीरीज़ में गेंदबाजों पर हावी रहे, जो सीरीज़ हार का सबसे बड़ा कारण बना।

ज़रूरत से ज़्यादा ऑलराउंडर्स की संख्या

इस समय में भारतीय टीम में ऑलराउंडर्स की संख्‍या अधिक है। नितीश रेड्डी, हर्षित राणा, रविंद्र जडेजा, और वॉशिंगटन सुंदर जैसे ऑलराउंडर्स कमजोर कड़ी साबित हो रहे हैं। हो यह रहा है, कि जिसको बॉलिंग में ध्‍यान देना चाहिए वह बल्‍लेबाजी में हाथ दिखा रहा है। बड़े-बड़े स्‍पेशलिस्ट बल्‍लेबाज सीरीज़ बचाने में नाकाम रहे, वहीं नितीश रेड्डी और हर्षित राणा के भरोसे 338 रन का पीछा करना बेईमानी लगती है।

पूराने अंदाज़ में नज़र आए कोहली

विराट कोहली ने इस सीरीज़ में बता दिया, कि उनकी जगह टीम में महत्‍वपूर्ण क्‍यों है। उन्‍होंने अपने करियर का 54वां शतक लगाकर यह बताया कि उनकी रनों की भूख अभी कम नहीं हुई है। अगर कोहली ने 93 रन की पारी ना खेली होती तो भारत के हाथ से शायद पहला वनडे भी फ‍िसल जाता। मौजूदा हालात को देखते हुए कोहली का हालिया फ़ॉर्म आगे भी इसी तरह रहना ज़रूरी है।  

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