- अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी
- स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर ईरान ने अगले आदेश तक लगाई रोक
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव
हाल ही अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन के युद्धविराम की ख़बर सुनकर जहां विश्व अपनी ख़ुशी जाहिर कर रहा था, उसे नहीं पता था, कि कुछ ही पल में अमेरिका-ईरान के बीच इतना तनाव बढ़ जाएगा, कि दोबारा मिसाइलों की दौर शुरू हो जाएगा। दरअसल ख़बर मिली थी, कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मोज़ से गुजर रहे कमेर्शियल जहाजों को अपना निशाना बनाया है, जिसपर अमेरिका ने इसे युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताते हुए ईरान पर एक के बाद एक क़रीब 90 ठिकानों पर पर मिसाइल दाग़े। इस पर ईरान भी कहां चुप रहता, उसने भी यूएई, बहरीन, क़तर और कुवैत में अमेरिका सैन्य ठिकानों पर हमले के दावे किए हैं।
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दोनों एक दूसरे पर लगा रहे हैं समझौता उल्लंघन का आरोप
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान आया, कि दोनों देशों के बीच अब युद्धविराम ख़त्म हो गया है, क्योंके ईरान ने समझौते का उल्लंघन किया है। दूसरी तरफ़ ईरान भी अमेरिका पर आरोप लगा रहा है, कि उल्लंघन उसकी तरफ़ से हुआ है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है, कि ईरान ने अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते का पूरी तरह पालन किया है। अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इसको लेकर पोस्ट भी किया, जिसमें उन्होंने साफ़ तौर पर अमेरिका पर आरोप लगाते हुए लिखा, कि अमेरिका ने युद्धविराम समझौता ज्ञापन (MoU) की धारा-9 का उल्लंघन किया है, जिसमें यह कहा गया था, कि अमेरिका क्षेत्र में सैन्य बलों की अतिरिक्त तैनाती नहीं करेगा।

हत्या की योजना के बीच डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी
इस दौरान इन ख़बरों ने भी जोर पकड़ लिया, कि ईरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की योजना बना रहा है, अब यह ख़बर कितनी सच है या इसके पीछे महज राजनीति मुद्दा है यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा? इस बीच हत्या की बात को लेकर डोनाल्ड ट्रप ने ईरान को सख़्त चेतावनी देते हुए कहा है, कि अगर ईरान उनकी हत्या की कोशिश की, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह ख़त्म कर देगा। इस पर ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, कि ईरान के खिलाफ़ 1 हज़ार मिसाइलें तैयार हैं और जरूरत पड़ी, तो हजारों और मिसाइलें तुरंत तैनात कर दी जाएंगी।
पश्चिम एशिया में एक बार फिर संकट
इस तनातनी के बीच पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव काफ़ी बढ़ गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है, कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी प्रिंस हसन एयर बेस पर कई बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। दूसरी तरफ़ ईरान ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से सभी जहाजों की आवाजाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इससे एक बार फिर कच्चे तेल के दाम आसमान छू सकते हैं और हम सब ने पिछली बार देखा था, कि होर्मुज़ के रास्ते कच्चे तेल के जहाज ना गुजरने से दुनियाभर में तेल का संकट पैदा हो गया था, जिससे महंगाई भी चरम पर पहुंच गई थी। अगर दस बार भी ऐसा हुआ, तो विश्व को बेहद बूरे संकट के दौर से गुजरना पड़ सकता है।
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क्या बातचीत होना मूमकीन है?
ऐसा कहा जा रहा है, दोनों देशों के बीच बातचीत के दरवाज़े अभी भी खुले हैं, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि संघर्षविराम खत्म हो गया है, लेकिन तनाव के बावजूद अमेरिका और ईरान बातचीत जारी रखने पर सहमत हैं। खैंर अभी जैसा माहौल है उसे देखकर कहना मुश्कि़ल है, कि दोनों देशों के बीच बातचीत हो भी पाएगी या नहीं। जैसा, कि हमने 60 दिन युद्धविराम वाले समझौते में देखा था।







