- जुर्माना न देने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी
- साल 2023 में हत्याकांड का था दोषी
बगहा से बड़ी खबर सामने आई है, जहां बगहा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-4) मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने धनहा थाना कांड संख्या 105/2023 के सिलसिले में सीरियल किलर सकलदेव यादव पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न देने पर आरोपी को 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है, कि जुर्माने की यह राशि पीड़ित के परिवार वालों को दी जाएगी।
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क्या था पूरा मामला?
सिविल कोर्ट बगहा के सहायक लोक अभियोजक (APP) जितेंद्र भारती ने बताया, कि यह मामला लक्ष्मी यादव की हत्या से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक़, सकलदेव ने रात में लक्ष्मी के सिर पर धारदार हथियार से हमला किया था, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
कोर्ट ने स्पष्ट किया
चश्मदीदों के बयान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद कोर्ट ने माना, कि सिर में गंभीर चोट और इंट्राक्रेनियल ब्लीडिंग (मस्तिष्क में रक्तस्राव) की वजह से उनकी मौत हुई थी। इस घटना के बाद FIR दर्ज होने में क़रीब 10 दिन की देरी हुई थी और शुरुआती जांच में आरोपी का नाम नहीं था, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया, कि इन अंतरालों से अभियोजन का मामला कमजोर नहीं होता। उपलब्ध सबूतों से बिना किसी शक के यह साबित हो गया, कि जानलेवा हमले में सकलदेव ही शामिल था।
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साल 2025 में सुनाई गई थी सजा
सीरियल किलर सकलदेव यादव को इससे पहले 4 अगस्त 2025 को इसी अदालत ने धनहा थाना कांड संख्या 111/2023 में झलारी देवी और पहवारी यादव के दोहरे हत्याकांड (डबल मर्डर) में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने उसे आदतन अपराधी और “सीरियल किलर” बताते हुए कहा कि वह समाज के लिए एक बड़ा खतरा है, इसलिए उसे अधिकतम सजा मिलनी चाहिए।
कोर्ट ने नहीं दिखाई सहानुभूति
बचाव पक्ष ने नरमी बरतने की गुहार लगाते हुए उसे अपने परिवार का इक़लौता कमाने वाला सदस्य बताया। हालांकि, कोर्ट ने उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और पहले मिल चुकी उम्रकैद की सजा को ध्यान में रखा। सजा सुनाते वक्त अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि “जघन्य हत्या के मामलों में आरोपी के साथ अनावश्यक सहानुभूति नहीं दिखाई जानी चाहिए।”
IPC की धारा 302 के तहत दोषी
बगहा ADJ-4 कोर्ट ने दोषी सकलदेव यादव को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत दोषी माना और 1 लाख रुपये के जुर्माने के साथ उम्रकैद की सख्त सजा सुनाई। यह सजा उसकी अन्य सजाओं के साथ चलेगी और कस्टडी में बिताई गई अवधि को कुल सजा में समायोजित कर दिया जाएगा।






