गोरखपुर: कूड़े का ढेर नहीं, अब ईको पार्क और पिकनिक स्पॉट है एकला बांध की पहचान

नगर निगम ने इसे वैज्ञानिक तरीक़े से साफ़ कर इस बांध को हरियाली की पहचान दी है
  • सिटी फॉरेस्ट के रूप में विकसित
  • व्‍यायाम और योग करने की सुविधा

कभी बदबू के लिए जाना जाता था

गोरखपुर का एकला बांध अब पहचरन में नहीं आता, क्‍योंकि यहां क़रीब तीन लाख टन लिगेसी वेस्ट जमा हुआ था और लंबे समय से कूड़े के ढेर और बदबू के लिए जाना जाता था। अब नगर निगम ने इसे वैज्ञानिक तरीक़े से साफ़ कर इस बांध को हरियाली की पहचान दी है, जहां अब खुलकर सांस लिया जा सकता है। इसे एक ईको पार्क और सिटी फॉरेस्ट के रूप में विकसित किया गया है।

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क्‍या-क्‍या है यहां?

ईको पार्क में वॉकिंग ट्रैक, फ़ुटपाथ, योग और ध्यान के लिए स्थान बनाए गए हैं। साथ ही बच्चों के लिए सुरक्षित किड्स ज़ोन भी तैयार किया गया है। कहा जा रहा है, कि आने वाले समय में यहां 131 फ़ीट ऊंचा तिरंगा भी लगाया जाएगा, जो इस जगह को नई पहचान देगा। साथ ही यहां पर एक तालाब और पैडल बोट की सुविधा भी उपलब्‍ध कराई गई है। इन सुविधाओं को देखकर कहा जा सकता है, कि यह पिकनिक स्पॉट के रूप में उभर रहा है।

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सड़क का भी हुआ डवलपमेंट

Background

नगर निगम ने एकला बंधे की सड़क का भी डवलपमेंट किया है। इस एकला बांध को नया रूप देने में क़रीब 18 करोड़ रुपये ख़र्च किए गए हैं। नगर आयुक्त के अनुसार, यह परियोजना ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और ‘ईको-टूरिज्म’ का बेहतरीन उदाहरण है, जो आने वाले समय में शहर की नई पहचान बनेगी।

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