- कच्चे तेल की क़ीमत में हो रहा है लगातार इज़ाफ़ा
- तेल कंपनियों को हो रहा है लगातार घाटा
कितने रुपये बढ़े दाम?
पिछले 2 सप्ताह में पेट्रोल और डीज़ल के दामों में लगातार चौथी बार बढोतरी हुई है। इस बार पेट्रोल की क़ीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर, वहीं डीज़ल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इससे अब दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीज़ल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। पहली बार पेट्रोल व डीज़ल में क़रीब 3 रुपये, दूसरी बार क़रीब 90 पैसे, तीसरी बार भी 90 पैसे के आसपास वृद्धि हुई थी।
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कहां कितनी क़ीमत?
मुंबई में इस समय पेट्रोल 111.21 रुपये और डीज़ल 97.83 रुपये प्रति लीटर, चेन्नई में 108.01 रुपये और डीज़ल 99.66 रुपये प्रति लीटर और कोलकाता में पेट्रोल 113.51 और डीज़ल 99.82 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। लखनऊ में पेट्रोल के दाम बढ़कर 101.89 रुपये और डीज़ल 95.36 रुपये प्रति लीटर और गोरखपुर में 102.13 रुपये पेट्रोल और 95.62 रुपये प्रति लीटर डीज़ल मिल रहा है।
| शहर | पेट्रोल (क़ीमत) | डीज़ल (क़ीमत) |
| दिल्ली | 102.12 रुपये | 95.20 रुपये |
| मुंबई | 111.21 रुपये | 97.83 रुपये |
| कोलकाता | 113.51 रुपये | 99.82 रुपये |
| चेन्नई | 108.01 रुपये | 99.66 रुपये |
| लखनऊ | 101.89 रुपये | 95.36 रुपये |
| गोरखपुर | 102.13 रुपये | 95.62 रुपये |
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में जारी संघर्ष ने बढ़ाए कच्चे तेल के दाम
ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में जारी संघर्ष के चलते कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे थे। कच्चे तेल के दाम 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा गया था, लेकिन सोमवार को कच्चे तेलों के दाम में गिरावट दर्ज की गई, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। तेल कंपनियों पर इसका दबाव बढ़ रहा था और यही कारण है, कि विश्वभर में पेट्रोल व डीज़ल के दाम आसमसन छूने लगे हैं। भारत अभी तक इससे अछूता था, लेकिन तेल में हो रहे घाटे के चलते यह क़दम उठाना पड़ रहा है।
आगे भी बढ़ सकती हैं क़ीमत
इस बीच देश की बड़ी तेल कंपनियों का कहना है, कि उन्हें लगातार रोज़ाना क़रीब 1,500 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। इसे देखते हुए इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी बड़ी तेल कंपनिया लगातार टुकड़ों में तेल के दामों में इज़ाफ़ा कर रही है, जिससे की उसका घाटा कम हो सके। तेल कंपनियों की माने तो आगे भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, ताक़ि घाटे को कम किया जा सके।
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