- चुनाव आयोग के फैसले को दी चुनौती
- TMC को कलकत्ता हाईकोर्ट से लग चुका है झटका
बंगाल का चुनावी घमासान
बंगाल का विधानसभर चुनाव ख़त्म हो गया है, लेकिन बीजेपी और TMC के बीच का चुनावी घमासान अभी भी जारी है। चुनावी घमासान तब शुरू हुआ, जब कई एजेंसीयों ने एग्जिट पोल में इस बार पश्चिम बंगाल में बड़े उलटफेर की ओर संकेत दिए। एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ TMC से आगे बताया गया है। ख़ैर यह तो 4 मई को ही पता चल पाएगा, कि किसकी सरकार बनेगी।
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स्ट्रॉन्गरूम का बवाल
बता दे, कि मतदान ख़त्म होते ही EVM और पोस्टल बैलेट बॉक्स को रखने के लिए चुनाव आयोग स्ट्रॉन्गरूम का इस्तेमाल करती है। बीते दिनों TMC ने एक वीडियो जारी करते हुए आरोप लगाया, कि बीजेपी EVM और पोस्टल बैलेट से छेड़छाड़ कर रही है, जिसके बाद देर रात तक बारिश के बीच TMC कार्यकर्ता और बीजेपी के बीच टकराव देखा गया। इस दौरान ममता बनर्जी के शामिल होने की ख़गर मिली और कहा गया, कि ममता बनर्जी स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर हैं।
TMC का आरोप, चुनाव आयोग ने कहा स्ट्रॉन्गरूम में सब ठीक
TMC लगातार आरोप लगाती रही, कि बीजेपी स्ट्रॉन्गरूम में मतदान से छेड़छाड़ कर रही है, वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा के समर्थकों का कहना था, कि ममता बनर्जी इस चुनाव में हार रही है, जिस वजह से बौखलाकर TMC बीजेपी पर झूठे आरोप लगा रही है। इस बीच देर रात को चुनाव आयोग को ख़ुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह बताना पड़ा की स्ट्रॉन्गरूम रूम में सब ठीक है, वहां किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई है।
बंगाल में हुई रिकॉर्ड वोटिंग, बहुत कुछ कहता है
TMC पिछले 15 वर्षों से बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ी पार्टी बनती आई है, लेकिन जिस तरह से बीजेपी ने इस बार चुनाव लड़ा, उससे ममता सरकार पूरी तरह घिरती हुई नज़र आई। इस बार यूंही नहीं 93 प्रतिशत तक वोट पड़े, इसके पीछे बड़े कारण है। पिछले बार के विधानसभर चुनावों से तुलना करें, तो लोग इस बार वोट देने के लिए घर से बड़ी संख्या में बाहर निकले हैं। इससे पता चलता है, कि कुछ तो अलग होने वाला है इस बंगाल चुनाव में।
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TMC ने की सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
पश्चिम बंगाल चुनाव के घमासान के बीच TMC ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। TMC ने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें मतगणना के दौरान केंद्र सरकार और केंद्रीय PSU कर्मचारियों को चुना गया है। TMC ने विरोध किया है, कि इस दौरान इसमें राज्य सरकार और राज्य PSU के कर्मचारियों आख़िर क्यों नहीं शामिल किया गया। इस याचिका के बाद CJI सूर्य कांत इस मामले की सुनवाई के लिए जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की स्पेशल बेंच का गठन किया है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिका कर दी थी ख़ारिज
बता दें, कि इससे पहले इस याचिका को कलकत्ता हाईकोर्ट लेकर गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस याचिका को सिरे से ख़ारिज कर दिया था। स मामले को लेकर हाइकोर्ट ने कहा, कि चुनाव आयोग के पास इसका पूरा अधिकार है, कि वह मतगणना के समय सुपरवाइज़र और असिस्टेंट किसे बनाना चाहता है। वो राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से किसी को भी चुनने का अधिकार रखता है। इसके बाद TMC ने हाईकोर्ट के आदेश को सु्प्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
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