- रिनिकी भुइयां सरमा पर लगाए थे तीन पासपोर्ट होने के आरोप
- कोर्ट ने खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर लगा दी थी रोक
पवन खेड़ा को भारी पड़ा आरोप लगाना
असम विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर तीन पासपोर्ट और विदेशों में बेनामी प्रॉपर्टी होने के बड़े आरोप लगाए थे, जिसके बाद असम चुनाव के दौरान गरमा-गर्मी वाला माहौल पैदा हो गया था। इस पर रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन खेड़ा के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया था। उसके बाद से पवन खेड़ा को काफ़ी मुसीबत का सामना करना पड़ा था।
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पवन खेड़ा को मिल गई सशर्त अग्रिम जमानत
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट से सशर्त अग्रिम जमानत मिल गई है। इससे पहले कोर्ट ने पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी थी। दरेबारा सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश को सुरक्षित रख लिया था। बता दें, कि गुवाहाटी हाईकोर्ट से पवन खेड़ा को राहत देने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
पवन खेड़ा की तरफ़ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने रखी दलील
पवन खेड़ा की तरफ़ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट के सामने कई दलीले रखते हुए कहा, कि सिर्फ़ आरोप के आधार पर किसी की गिरफ़्तारी सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा, कि अभियोजन पक्ष के बयानों से यह साफ़ होता है, कि खेड़ा की गिरफ़्तारी की आशंका सही है। दूरी तरफ़ असम सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, कि पवन खेड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बैकड्रॉप में लिखी हुई बातों से साफ होता है, कि यह चुनाव के दौरान सनसनी फैलाने के लिए यह आरोप लगाए गए थे।
कौन-से शर्त रखे हैं सुप्रीम कोर्ट ने?
1) पुलिस के बुलाने पर थाना जाना होगा।
2) जांच में पूरी सहयोग देना होगा।
3) सबूतों से छेड़छाड़ नहीं कर सकते।
4) बिना अनुमति देश छोड़कर नहीं जा सकते।
5) अगर ज़रूरत पड़ी जो और भी शर्तें लागू किए जा सकते हैं।



