वंदे मातरम् के 150 साल, हिल गई थी कभी इस गीत से अंग्रेज़ों की नींव

1875 में जब बंकीमचंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम् गीत की रचना की थी, तब किसी ने सोचा तक नहीं होगा, कि यह गीत भारत की आज़ादी में ऐसी भूमिका निभाएगी, कि अंग्रेज़ों की नीव हिला देगी। अंग्रेज़ इस गीत की ताक़त से इतना डर गए थे, कि अंग्रेज़ों ने वंदे मातरम् के नारे पर रोक…

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लोकल ट्रेन में हुई हत्‍या, मुंबई की लाइफ़लाइन आसान नहीं

मुंबई की लाइफ़लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन मे मामूली से वादविवाद में किसी की हत्‍या कर दी जाए, तो यह बेहद गंभीर मामला है। पूरी मुंबई हर तरह से इस लोकल ट्रेन पर निर्भर करती है। सुबह और शाम के वक्‍़त भीड़ इस क़दर होती है, कि कभी-कभी चढ़ना और उतरना संभव नहीं हो…

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अपने ही पैर पर कुल्‍हाड़ी मारता बांग्‍लादेश, भूल गया 1971

1971 के लिबरेशन वॉर में भारत की मदद से जब बांग्‍लादेश का जन्‍म हुआ, जो कभी पूर्वी पाकिस्‍तान के नाम से जाना जाता था, तब किसी ने सोचा नहीं होगा, कि एक दिन यही बांग्‍लादेश अपनी पहचान मिटाकर दोबारा पाकिस्‍तान के नक्‍़शे क़दम पर इस तरह चल पड़ेगा, कि वो भारत को ही आंख दिखाने…

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शर्मनाक है समाजसेवा के नाम पर बेज़ुबान जानवरों की हत्‍या

इंसान की उत्‍पत्‍ती जबसे हुई उसने अपनी सुविधा के लिए वो सब कुछ किया जिससे उसका जीवन ज़्यादा से ज़्यादा आसान बन सके। इसके लिए उसने कई अविष्‍कार किए, खोजें की और इसी बढ़ती लालसा में वो इतना डूब गया, कि उसे इतना ध्‍यान भी नहीं र‍हा, कि उसने प्राकृतिक का कितना नुकसान किया। उसे…

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