- शिक्षक भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के आवास पर छापेमारी
- घोटाले में 2022 में जा चुके हैं जेल
पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल तेज़
पश्चिम बंगाल चुनाव में हर दिन सियासी हलचल बढ़ती ही जा रही है। इस बार यह हलचल शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ा हुआ है। यह वही शिक्षक भर्ती घोटाला है, जो साल 2022 में तृणमूल सरकार में रहे पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी पर इसके आरोप लगे थे। बता दें, कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर एक बार फिर कार्रवाई तेज़ कर दी है और पार्थ चटर्जी के आवास पर ED की टीम पहुंची।
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तृणमूल कांग्रेस के पूर्व शिक्षा मंत्री गए थे जेल
प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में 23 जुलाई 2022 को पार्थ चटर्जी को ED ने गिरफ़्तार किया था। छापेमारी के दौरान ED को उनके आवास और उनके क़रीबियों के पास से बड़ी संख्या में कैश और सोने मिले थे। इस मामले में वह लगभग तीन साल तक जेल में भी रहे थे। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से सशर्त ज़मानत मिल गई थी।
SSC भर्ती घोटाले का आरोप
स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) भर्ती घोटाले में उन्हें एक बार फिर से तलब किया गया था, लेकिन वह पेशी से बार-बार बचते रहे। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया, कि पार्थ चटर्जी को कई बार इस बारे में समन भेजा गया था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी हवाला देते हुए कई दिनों से पेशी से बचते रहे। इस कारण बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद उन्होंने सहयोग नहीं दिया, इसलिए ED ने सीधे उनके आवास पर पहुंचकर पूछताछ करने का फ़ैसला लिया।
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क्या चुनाव पर पड़ेगा असर?
अब देखना दिलचस्प होगा, कि इससे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में क्या असर पड़ता है। अचानक चुनाव में पार्थ चटर्जी का नाम वापस सुनाई देना, टीएमसी के लिए चिंता की बात हो सकती है। यह बहुत बड़ा घोटाला था और इस छापेमारी ने बंगाल की जनता को उस घोटाले की दोबारा याद दिलादी है।
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