- कैश,शराब, ड्रग्स और कीमती धातुएं मिले
- 2021 के चुनाव में भी जब्त हुए थे करोडों के सामान
बंगाल चुनाव का इतिहास हिंसा और डर
चुनाव के दौरान बंगाल में जहां हिंसा अपने चरम पर होती है और लोगों को डरा-धमका कर वोट देने की प्रक्रिया यहां के चुनाव की आम बात है। अब ऐसे हिंसक माहौल में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना चुनाव आयोग के लिए इस बार चुनौती से कम नहीं था। चुनौवी माहौल को शांत बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग पिछले कई महीनों से सक्रिय रही है। ख़ासकर TMC के इतिहास को देखते हुए उनके ख़िलाफ़़ उनका सख्त रुख साफ़ देखा जा सकता है।
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कितने करोड़ रूपये की हुई जब्ती?
इस बार भी चुनाव के दौरान करोड़ों रुपये की जब्ती की गई है। चुनाव आयोग के अनुसार इस बंगाल विधानसभा चुनाव में क़रीब 510 करोड़ रुपये से अधिक रुपये की जब्ती हो चुकी है। इसके अंतर्गत 30 करोड़ रुपये कैश, 126.85 करोड़ रुपये की शराब, 110.12 करोड़ रुपये के ड्रग्स, 58.28 करोड़ रुपये की क़ीमती धातुएं और 184.85 करोड़ रुपये के घरेलू सामान, कपड़े और मोबाइल फोन जैसे मुफ़्त सामान बरामद किए गए।
इस बार 171 करोड़ रुपये की ज़्यादा जब्ती
साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी चुनाव आयोग ने 339 करोड़ रुपये की जब्ती की थी। इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 510 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछली बार के मुक़ाबले 171 करोड़ रुपये है। यह करोड़ों की जब्ती अपने आप में बंगाल चुनाव की कहानी बयां करती है और यह भी बताता है, कि बंगाल के इतिहास में कैसे गुंडाराज का बोलबाला रहा है। यही नहीं आयोग के अनुसार बंगाल के चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए सोने और चांदी जैसी क़ीमती धातुओं का भी उपयोग किया जाता रहा है।
फ़्लाइंग स्क्वायड टीमों की तैनाती
इलेक्शन कमीशन ने बंगाल चुनाव में सख्ती अपनाते हुए राज्यों में 2,728 से अधिक फ़्लाइंग स्क्वायड टीमों को तैनाती की गई है और मतदाताओं के शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के अंदर करने का लक्ष्य रखा था। इसके अलावा आयोग ने विभिन्न स्तरों पर लगातार समीक्षा बैठकें की प्रवर्तन एजेंसियों (ED) को सतर्क रहकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।



