- 4 और नेताओं ने ली मंत्री पउ की शपथ
- राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने दिलाई शपथ
हिमंता बिस्वा सरमा का दूसरी बार राजतिलक
पश्चिम बंगाल के शपथ ग्रहण के बाद सबकी नज़रें असम के शपथ ग्रहण पर थी, जहां हिमंता बिस्व सरमा ने दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लिया। इस दौरान राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने गुवाहाटी के खानापारा स्थित पशु चिकित्सा महाविद्यालय मैदान में मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
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असम में बीजेपी की बड़ी जीत
हाल ही में 4 मई को आए चुनावी परिणाम में असम की 126 सीटों की लड़ाई में बीजेपी गठबंधन ने कांग्रेस का सफ़ाया करते हुए 102 सीटें अपने नाम की थी। दूसरी तरफ़ गौरव गोगई के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी को मात्र 22 सीटें ही मिली, जिसमें गौरव गोगई को भी हार का सामना करना पड़ा। यह जीत इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि कांग्रेस लगातार हिमंता बिस्व सरमा भ्रष्टाचार और भूमि घोटाले का आरोप लगा रही थी। साथ ही उनकी पत्नी पर भी तीन पासपोर्ट रखने और विदेशों में प्रॉपर्टी होने के आरोप लगाए थे, लेकिन जनता ने हिमंता बिस्व सरमा पर अपना विश्वास बनाए रखा और दूसरी बार उनको अपना मुख्यमंत्री चुना।
कौन-से चार मंत्रियों ने ली शपथ
हिमंता बिस्व सरमा के अलावा 4 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रामेश्वर तेली और अजंता नियोग (महिला) के अलावा असम गण परिषद (AGP) के अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के चरण बोरो ने मंत्री पद की शपथ ली।
| BJP | AGP | BPF |
| रामेश्वर तेली | अतुल बोरा | चरण बोरो |
| अजंता नियोग (महिला) |
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प्रधानमंत्री रहे उपस्थित
बंगाल के ऐतिहासिक शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के शपथ ग्रहण में भी स्वयं उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यपाथ, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी समेत भाजपा शासित राज्यों के अन्य मुख्यमंत्री भी समारोह में उपस्थित थे।

बंगाल से असम तक बीजेपी सरकार
इस शपथ में हिमंता बिस्वा सरमा के साथ बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी दिखे। यह पहली बार है जब असम के पड़ोसी राज्य बंगाल में भी बीजेपी सरकार है। इसके कई मायने भी हैं। इसे दोनों राज्यों के विकास और सुरक्षा की नज़र से अहम माना जा रहा है। इसके अलावा घुसपैठिए का जो मुद्दा पूरे चुनाव में रहा उसके लिए भी इसे बेहतर अवसर के रूप में देखा जा रहा है।



