बंगाल विधानसभा चुनाव: बीजेपी की 5वीं सूची में किस-किस के हैं नाम?

भारतीय जनता पार्टी ने पश्‍चिम बंगाल में अपनी 5वीं सूची भी जारी कर दी है। जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है, बंगाल का सियासी माहौल भी गर्म होता जा रहा है।
  • 294 में से 292 सीटो के नाम घोषित
  • कुछ उम्‍मीदवारों को नामों में बदलाव

भारतीय जनता पार्टी ने पश्‍चिम बंगाल में अपनी 5वीं सूची भी जारी कर दी है। जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है, बंगाल का सियासी माहौल भी गर्म होता जा रहा है। पिछले तीन बार से लगातार जीत हासिल करते आ रही तृणमुल कांग्रेस को मात देना, किसी भी पार्टी के आसान नहीं है, लेकिन बीजेपी इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने की कोशिश में लगी है।

बीजेपी की 5वीं सूची

इसी बीच वह काफ़ी सोच-समझ कर उम्‍मीदवारों की सूची तैयार कर रही है और नामों में भी बदलाव कर रही है। बीजेपी की 5वीं सूची जारी होने के बाद अब 294 विधानसभा सीटों में से 292 सीटों पर अपने उम्‍मीदवारों के नाम की घोषणा कर चुकी है। सूची के अनुसार नाम इस प्राकर हैं:

1) तारकनाथ चटर्जी, कृष्णानगर उत्तर से।

2) रुद्रप्रसाद बनर्जी, उलूबेरिया पूर्व विधानसभा क्षेत्र से।

3) अनुपम बिस्वास कल्याणी से।

4) सौरव सिकदर,दमदम उत्तर से।

5) अनिंद्य राजू बनर्जी, मध्यमग्राम से।

कुछ नामों में बदलाव

इसके अलावा पार्टी ने अपनी पिछली सूची में शामिल कुछ उम्‍मीदवारों नामों में भी बदलाव किए हैं। इस सूची के तहत अब कौशिक सिद्धार्थ बसीरहाट उत्तर से, अभिजीत सरदार बिष्णुपुर सीट से और शंकर सिकदर बेहाला पूर्व विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडेंगे।

Union Minister Dharmendra Pradhan: PBSHABD

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ममता सरकार पर साधा निशाना

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है, कि पश्‍चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद पूरी तरह से फ़ैला हुआ है। साथ ही कहा, कि सरकार जनता के हितों की बात नहीं करती, बल्‍कि अपने निजी हितों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, कि जनता सब देख रही है और इस बार के चुनाव में जनता निर्णायक भूमिका निभाने वाली है। शिक्षा मंत्री ने बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलने की उम्मीद जताई है।

NEP नीति पर बोले शिक्षा मंत्री

इसके अलावा धर्मेंद्र प्रधान ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधाते हुए कहा है, कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में कहीं यह नहीं कहा गया है, कि केवल हिंदी ही पढ़ाई जाएगी, बल्‍कि उसमें साफ़ लिखा है, कि प्रत्येक राज्य में छात्रों को अपनी मातृभाषा पढ़ाई जाएगी और साथ ही इसके साथ ही वह दूसरे भारतीय भाषाओं को भी चुन सकते हैं।

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