क्‍या इस बार बंगाल चुनाव में रुकेगी हिंसा या दोहराया जाएगा इतिहास?

इतिहास गवाह रहा है, कि बंगाल विधानसभा चुनाव कभी इतना आसान नहीं रहा। इसके इतिहास में जाएं तो, हिंसा की आग जलती नज़र आएगी।
  • बंगाल चुनाव का इतिहास रहा है ख़ून-ख़राबा
  • 23 और 29 अप्रैल को होने हैं चुनाव

कभी आसान नहीं रहा बंगाल चुनाव

इतिहास गवाह रहा है, कि बंगाल विधानसभा चुनाव कभी इतना आसान नहीं रहा। इसके इतिहास में जाएं तो, हिंसा की आग जलती नज़र आएगी। क़रीब 50 साल पीछे जाएं, तो वार्म मोर्चा और कांग्रेस के दौर में ख़ून-ख़राबा, बूथ पर कब्‍जा, आगजनी, चुनाव में धांधली और हत्‍याकांड जैसे मामले प्रमुखता से छाए रहे। वक़्त गुज़रता गया और सरकारे बदलती गई, लेकिन बंगाल में एक चीज़ नहीं बदली, वों है हिंसा और सत्‍ता पर रहने की भूख, एक ऐसी भूख जिसे मिटाने के लिए इंसानियत को भी तार-तार कर दिया जाता है।

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टीएमसी के आने के बाद भी नहीं रुकी हिंसा

2011 से अब तक बंगाल में तृणमुल कांग्रेस (टीएमसी) की सरकार है, लेकिन टीएमसी के सत्‍ता में आने के बाद में भी इतिहास नहीं बदला और हर चुनाव में वहीं हिंसा की ख़बरे पूरे देश में सुनाई देती रही और टीएमसी सत्‍ता में आते रही। शांति का दावा हर चुनाव में किया जाता रहा, लेकिन हर चुनाव शोर-शराबे से ही भरा रहा। टीएमसी पिछले 3 विधानसभा चुनाव आसानी से जीतते आई है और इस बार भी ममता बनर्जी चौथी बार मुख्‍यमंत्री बनने का दावा कर रही है, लेकिन बंगाल में चुनाव कैसे जीता जाता रहा है, इससे हर कोई वाकिफ़ है। बंगाल चुनाव मतलब हिंसा ये आम बात हो गई है। 2021 विधानसभर चुनाव में सबने देखा, कि कैसे हथियार और विस्‍फ़ोटक चीजों का चुनाव के दौरान इस्‍तेमाल हुआ।

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क्‍या इस बार बदलेगी तस्‍वीर?

अब सवाल उठता है, कि क्‍या इस बार भी वहीं सबकुछ देखने को मिलेगा या बंगाल चुनाव की हवा बदलेगी। इस बार के पश्‍चिम बंगाल चुनाव में भाजपा पूरी तैयार के साथ नज़र आ रही है और उसने कुछ ऐसे नामों को उममीदवार बनाया है, जो टीएमसी के लिए चुनौती पैदा कर सकते है। इस बार टीएमसी के लिए बाज़ी आसान नहीं दिख रही। चुनाव के पहले से ही बंगाल में  अवैध रूप से रह रहे बांग्‍लादेशी का मुद्दा गरमाया हुआ था और उसके बाद एसआईआर लागू होने से वोटरो का नाम कटना टीएमसी के खेमें में खनबली मचाने के लिए काफ़ी था। ममता बनर्जी ने इसके बीजेपी की मनमानी बताया और अदालत का दरवाज़ा ख़टखटाया।  

चुनाव आयोग सख्‍़त   

इस बीच इतिहास को ग़ौर में रखते हुए चुनाव आयोग भी काफ़ी सख्‍़त पेश आ रही है। पिछले बार 8 चरण में हुए चुनाव को चुनाव आयोग ने 2 चरण में समेट दिया है। इसे शांति के साथ चुनाव कराने का प्रयास कहा जा सकता है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए, रिटर्निंग ऑफ़‍िसर पदों पर नए सिरे से बदलाव किए हैं।

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73 रिटर्निंग ऑफ़‍िसर का तबादला

हाल ही में भवानीपुर समेत कुल 73 रिटर्निंग ऑफ़‍िसर का चुनाव आयोग ने ट्रॉसफ़र कर दिया था। उसी सूची में मौजूद 14 और रिटर्निंग ऑफ़‍िसर का एक बार फि‍र तबादला किया गया है। इस बदलाव जलपाईगुड़ी, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और बांकुड़ा जैसे सात जिलों में किया गया। साथ ही 9 विधानसभा क्षेत्रों में पड़े खाली पदों पर नए रिटर्निंग ऑफ़‍िसर को चयनित किया गया है।

अवैध हथियार और बम किए जब्‍त

सुरक्षा के मद्देनज़र निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में अब तक लगभग 221 करोड़ की नकदी के साथ शराब, ड्रग्स, क़ीमती धातु और करोड़ों फ्रीबीज़ जब्त कर ली गई हैं। साथ ही  सुरक्षा बलों ने अवैध हथियार और बम और लाइसेंसधारी हथियारों को भी जब्‍त कर लिया है। चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन करने और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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