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मुंबई के बीएमसी पर भाजपा का नियंत्रण, रितु तावड़े बनी नई मेयर

4 दशक बाद भापजा लौट रही है बीएमसी में। ठाकरे परिवार का वर्चस्‍व अब लगभग ख़त्‍म। जनता ने महायुति पर अपना विश्‍वास बरक़रार रखा है।

  • 4 दशक बाद बीएमसी में लौटी भाजपा
  • रितु तावड़े बनी पहली महिला महापौर

भाजपा ने आख़‍िरकार बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के नए मेयर की अटकलों को ख़त्‍म करते हुए मेयर का ऐलान कर दिया है। भाजपा की रितु तावड़े को बीएमसी का नया महापौर चुना गया है, वहीं शि‍व सेना के संजय घाडी को उप मेयर चुना गया है। इस दौरान महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडनवीस और उप मुख्‍यमंत्री एकनाथ शिंदे मौजूद रहे।

कौन हैं रितु तावड़े?

53 वर्षीय रितु तावड़े पिछले कई वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं और ज़मीनी स्‍तर पर काम करने के चलते लोगों के बीच उनका अलग ओहदा है और लोगों के साथ इसी जुड़ाव के चलते मुंबई सेंट्रल लाइन घाटकोपर (वेस्‍ट) से तीन बार पार्षद का चुनाव जीत चुकी हैं। रितु तावड़े बीएमसी शि‍क्षा समिति की अध्‍यक्ष भी रह चुकी हैं। उनकी सामाजिक व राजनीतिक सक्र‍ियता और योगदान को देखते हुए इन्‍हें बीएमसी मेयर का एक मजबूत चेहरा माना जा रहा है।

4 दशक बाद भाजपा लौटा बीएमसी में

महाराष्‍ट्र में भाजपा की बढ़ती लोकप्रयिता के चलते हाल ही में हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में भी जनता का विश्‍वास भाजपा पर बना रहा। 227 सीटों पर हुए बीएमसी चुनाव में भाजपा 89 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। साथ में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीट मिले थे और 118 सीट जीतकर महायुति ने बीएमसी चुनाव जीत लिया। 4 दशक बाद ठाकरे परिवार का वर्चस्‍व बीएमसी से भी ख़त्‍म हो गया। यही एकमात्र उम्‍मीद थी, जिससे वह मुंबई में अपना राज क़ायम रख सके, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और उद्धव ठाकरे व राज ठाकरे के मिलकर चुनाव लड़ने के बाद भी ठाकरे परिवार बीएमसी की सीट नहीं बचा पाया।  

ठाकरे परिवार की छवि ख़राब हुई

उद्धव ठाकरे वाली शि‍वसेना की छवि भाजपा से अलग होने के बाद महाराष्‍ट्र में लगातार ख़राब ही होती आई है। बालासाहेब ठाकरे ने अपने विचारों से शिवसेना को महाराष्‍ट्र में खड़ा किया था और उनकों सबसे ज़्यादा जनता का प्‍यार मिला और उन्‍होंने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया। उद्धव ठाकरे का कांग्रेस पार्टी से हाथ मिलाना भारी पड़ा और जनता ने उन्‍हें हर मोर्चे पर नकार दिया है। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना पर महाराष्‍ट्र की जनता ने भरोसा जताया है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना, भाजपा और स्‍वर्गीय अजीत पवार की एनसीपी मिलकर महायुति सरकार के रूप में महाराष्‍ट्र में काम कर रही हैं, जिसमें भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।   

2025 में हुए महाराष्‍ट्र चुनाव की 288 सीटों में महायुति की सरकार को 207 सीट मिली थी और विपक्ष में खड़े लोगों को धाराशायी कर दिया था।   

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