- पश्चिम बंगाल में आयोग सख्त
- बाइक चलाने पर भी लग चुकी है पाबंदी
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 लागू
पश्चिम बंगाल चुनाव में बाइक पाबंदी के बाद अब इलेक्टोरल ऑफिसर ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 को लागू करने के आदेश दे दिए हैं। इस अधिनियम के तहत चुनाव प्रचार के लिए बाहर से लाए गए राजनीतिक पदाधिकारी, पार्टी कार्यकर्ता और समर्थकों को चुनाव प्रचार ख़त्म होने के बाद अगले 48 घंटे (जब तक मतदान ख़त्म नहीं हो जाते) तक चुनाव क्षेत्र से दूर रहना होगा।
अधिकारियो पर भी होगी कार्रवाई
आयोग ने यह भी कहा है, कि यदि कोई भी अधिकारी अपनी ड्यूटी के दौरान में लापरवाही करता या ग़लत तरीक़े का व्यवहार करता पाया गया, तो उस पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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बाइक रोक पर कुछ बदलाव
इससे पहले चुनाव आयोग ने मतदान के दौरान मोटरसाइकिल के उपयोग पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था, जिस पर आयोग ने मामूली बदलाव भी किए हैं। अब डिलीवरी व राइड सर्विस प्रोवाइडर जैसे गिग वर्कर्स और ऑफ़िस जाने वालों को छूट दे दी गई है। उन्हें बाइक ले जाते समय अपने साथ सही पहचान पत्र रखना होगा, जिससे की उनकी पहचान की जा सके, अन्यथा कार्रवाई होगी।
हिंसा ना हो इसलिए बाइक पर रोक
बता दें, कि इलेक्शन कमिशन बंगाल में इस बार शांति के साथ चुनाव कराना चाहता है, क्योंकि बंगाल का इतिहास इस मामले में अच्छा नहीं कहा जा सकता। आयोग ने किसी भी प्रकार की हिंसा और तनाव को रोकने के लिए मतदान से दो दिन पहले बाइक रैलियां पर पूरी बैन लगा दिया है। शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक बाइक चलाने पर पाबंदी होगी।



