- 11,200 करोड़ रुपये के निवेश सेतैयार किया गया एयरपोर्ट
- मल्टी-मॉडल के रूप में तैयार है एयरपोर्ट
विकास की गति में तेज़ उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश एक के बाद एक विकास की नई सीढ़ियां चढ़ता जा रहा है। हाल ही में ग्रेटर नोएडा में ‘मेंड-इन-इंडिया’ सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन, उसके बाद नमो भारत रैपिड रेल व मैट्रो की शुरुआत और उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जापान-सिंगापुर दौरे से उत्तरप्रदेश को क़रीब 2.50 लाख करोड़ का निवेश प्रमुख हैं। ये उदाहरण बताते हैं, कि उत्तर प्रदेश आज किस गति से आगे बढ़ रहा है।

कभी नक़्शे में अदृश्य था यूपी
इससे पहले की सरकारों में यही उत्तर प्रदेश विकास के नक़्शे से हमेशा अद्देश्य रहा। सत्ता बदलती रही, लेकिन उत्तर प्रदेश नहीं बदला। किसी ने इसे बदलने की चाह नहीं दिखाई। नतीज़ा यह रहा, कि यूपी की छवि हमेशा ख़राब रही। 2017 के बाद जब योगी आदित्यनाथ को यहां कमान सौंपी गई, तो सब हैरान थे, लेकिन उसके बाद यूपी जिस रफ़्तार से आगे बढ़ा, इसने विपक्ष को भी हैरान कर दिया है। अब उत्तर प्रदेश विकास दर में लगातार अपनी पहचान बना रहा है और नोएडा में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन इसका एक और बड़ा उदाहरण है।

11,200 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हवाई अड्डा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोएडा में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन किया। यमुना एक्सप्रेस-वे पर स्थित 11,200 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार यह हवाई अड्डा मल्टी-मॉडल केंद्र के रूप में तैयार किया गया है, जो सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय ट्रासपार्ट को आसानी से कनेक्ट करता है। इस एयरपोर्ट पर एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब भी मौजूद है, जिसकी माल ढुलाई की क्षमता प्रति वर्ष 2.5 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा है। इस एयरपोर्ट की ख़ास बात यह है, कि शुरुआती दौर में क़रीब 1 करोड़ 20 लाख सालाना यात्रियों के संचालन की क्षमता है, जिसे प्रति वर्ष 7 करोड़ यात्री तक बढ़ाया जा सकेगा।

सबसे बड़ी ग्रीनफ़ील्ड परियोजना
नोएडा के इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल सिस्टम को ध्यान रखकर तैयार किया गया है। बता दें, कि इस एयरपोर्ट का डिज़ाइन भारतीय विरासत से प्रेरित है और भारत की सभ्यता से जुड़ा हुआ है। यह इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफ़ील्ड परियोजनाओं में से एक है।
दिल्ली-एनसीआर के लिए नई सौग़ात
इस एयरपोर्ट की एक और ख़ास बात यह है, कि इसे प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत डवलप किया गया है। भीड़ को देखते हुए और यात्री क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य ये यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के लिए नई सौग़ात है। नई दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इसके बाद नोएडा का यह एयरपोर्ट यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाएगा। यह दोनों हवाई अड्डे मिलकर एनसीआर क्षेत्र के लिए एक एकीकृत विमानन प्रणाली के तहत काम करेंगे।



