- ग्रीन कॉरिडोर की लागत है 1,519 करोड़ रुपये
- 10 से 15 मिनट में पूरी होगी घंटो की यात्रा
लखनऊ में आजकल ग्रीन कॉरिडोर परियोजना काफ़ी चर्चा में है, जिसे लेकर कहा जा रहा है, कि ‘मुस्कुराइए! आप लखनऊ में हैं’। ग्रीन कॉरिडोर महज एक परियोजना नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में जुड़ने वाला नया अध्याय भी है। किसर भी प्रदेश की राजधानी अगर लगातार विकास की सीढ़ियां चढ़ रही हो, तो उसके माध्यम से पूरे प्रदेश का नाम भी विश्व स्तर पर लिया जाता है, यहीं कारण है, कि आज दुनिया में उत्तर प्रदेश का नाम ऊपर उठने लगा है और हाल ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान-सिंगापुर यात्रा इसका प्रमाण है।

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क्या है ग्रीन कॉरिडोर परियोजना?
लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रीन कॉरिडोर परियाजना उद्घाटन और शिलान्यास किया, जिसकी कुल लागत 1,519 करोड़ रुपये है। इसके अंतर्गत 299 करोड़ रुपये की लागत से तैयार फेज-2 का उद्घाटन 1,220 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले फेज-3 व फेज-4 परियोजना का शिलान्यास किया। यह प्रदेश की राजधानी के लिए यातायात की दृष्टि से लखनऊवासियों के लिए नई सौगात है। यह परियोजना जहां समय की बचत तो करेगी ही, वहीं यात्रा को सुगम और थकानरहित बनाएगी। इसके अंतर्गत जहां, घंटो की दूरी अब 10 से 15 मिनट में पूरी कर ली जाएगी।
28 किलोमीटर लंबी परियोजना
यह ग्रीन कॉरिडोर परियोजना शहर के सेंटर से गुजरते हुए शहीद पथ और किसान पथ को आपस में जोड़ने का काम करेगा, जो 28 किलोमीटर लंबी परियोजना है और इसकी लागत 7 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा है। इससे पहले इस परियोजना में आईआईएम सेसे पक्का पुल तक बांध चौड़ीकरण और फ़्लाईओवर का काम हो चुका है। अब फेज-2 में डालीगंज पुल से समतामूलक चौक तक 7 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के उद्घोटन होने से क़रीब 15 लाख प्रदेशवासी इसका लाभ उठाने वाले हैं। इसके बाद इस ग्रीन परियोजना में समतामूलक चौक से शहीद पथ तक 10 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का काम रफ़्तार पकड़ेगा।

इस परियोजना का नाम ग्रीन कॉरिडोर क्यों?
पूरी दुनिया में पर्यावरण को बेहतर करने के लिए कई तरह की योजनाएं तैयार की जा रही है, जिसमें ग्रीन मोबिलिटी प्रमुख योजनाओं में से एक है। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना को तैयार किया, जो पर्यावरण की दृष्टि से उल्लेखनीय है, क्योंकि अगर पर्यावरण ही सही नहीं रहेगा, तो हमारा जीवन भी प्रभावित होगा। इस परियोजना की ख़ास बात यह है, कि इसे तैयार करने में किसी भी पेड़ को नहीं काटा गया है, बल्कि दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया है और ग्रीनरी पर ध्यान केंद्रीत कर इस परियोजना को तैयार किया गया है और किया जा रहा है।

इस परियोजना की ख़ास बात
इस परियोतना की ख़ास बात यह है, कि इसे सिविल और डिफ़ेस सेक्टर ने मिलकर बनाया है। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, कि जब सिविल और डिफ़ेस सेक्टर मिलकर काम करते हैं, तो प्रगति तेज़ रफ़्तार से दौड़ती है और ग्रीन कॉरिडोर इसका सही उदाहरण है।
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जल्द मिलगी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सौगात
ग्रीन कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान रक्षा मंत्री ने लखनऊवासियों को एक और ख़ुशख़बरी देते हुए कहा, कि जल्द ही 4,500 करोड़ रुपये की लागत से 62 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस का काम भी मार्च के अंत में या अप्रैल की शुरुआत में आरंभ कर दिया जाएगा। इससे घंटो लगने वाली लखनऊ से कानपुर की यात्रा 35 से 40 मिनट में पूरी हो जाएगी।

युनेस्को ने कौन सी मान्यता दी है लखनऊ को?
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बढ़ते लखनऊ की चर्चा करते हुए कहा, कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लखनऊ में जिस तरह विकास हुआ है, क़ानून-व्यवस्था बेहतर हुई है, स्वच्छता को लेकर जिस तरह काम हुआ है और माफ़ियाओं का सफ़ाया हुआ है, उसे देखते हुए लखनऊ की तहज़ीब और विकास यात्रा पूरे विश्व में फ़ैली है। इसे देखते हुए यूनेस्को ने लखनऊ को क्रिएटिव सिटी ऑफ़ गैस्ट्रॉनॉमी के रूप में मान्यता दी है।

ब्रह्मोस मिसाइल अब उत्तर प्रदेश में
राजनाथ सिंह ने कहा, कि हम सबने इस पर ध्यान दिया है, कि लखनऊ डिफ़ेंस सेक्टर में पीछे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, कि पाकिस्तान को घूटने टेकने पर मजबूर करने वाला ब्रह्मोस मिसाइल अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की धरती पर तैयार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, कि लखनऊ बेहतरीन राजधानी का उदाहरण है, जो यातायात, स्वच्छता और क़ानून व्यवस्थाा का केंद्र बनता जा रहा है। देश-दुनिया के मेहमान आकर यहां की आबो-हवा की सराहना करते हैं, इससे पता चलता है, कि ‘मुस्कुराइए, आप लखनऊ में है’ यह लखनऊ का प्रतीक बनता जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान ग्रीन कॉरिडोर बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले सभी कर्मचारियों को पुरष्कार देने के साथ-साथ उनके ऊपर पुष्प वर्षा भी की गई।
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