- दोषी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा
- पति के शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में सीमेंट से जमा दिया था
आख़िरकार डेढ़ साल बाद उत्तर प्रदेश के मेरठ नीले ड्रम हत्याकांड में कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुनाया, जिसमें ज़िला जज अरविंद कुमार ने पति की हत्या की दोषी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई। इस फ़ैसले को ऐतिहासिक तौर पर देखा जा रहा है। फांसी की सजा आते ही कोर्ट रूम और बाहर मौजूद वकीलों ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए आपस में मिठाइयां बांटी। इससे पता चलता है, कि यह घटना कितनी बड़ी थी, जिसपर पूरे देश की नज़र थी। यह सिर्फ़ इस घटना के लिए नहीं बल्कि ऐसी तमाम घटनाओं के लिए सबक है।
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क्या शव के टुकड़े करते वक़्त उसकी रूह नहीं कांंपी?
सोच कर भी हैरानी होती है, कि कोई ऐसा कैसे कर सकता है, वो भी अपने पति के साथ, जिसने शादी के वक़्त इस रिश्ते को निभाने के लिए सात क़समें खाईं थी। इंसान नहीं बल्कि कोई हैवान ही ऐसा कर सकता है। कैसे पत्नी मुस्कान ने अपने प्रेमी संंग मिलकर अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या की और फिर ख़ुद को बचाने के लिए शव के टुकड़े किए और नीले ड्रम में सिमेंट में जमा दिया। क्या यह करते हुए उस पत्नी की रूह नहीं कांपी। अगर उसे उसके साथ नहीं रहना था, तो उसके लिए दूसरे क़ानूनी प्रक्रियाएं हैं अलग होन के, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग हत्या जैसा जघन्य अपराध का रास्ता चुनते हैं।
काश मुस्कान ने यह भी सोचा होताी
इस अपराध को करते समय उसने यह भी नहीं सोचा, कि वो किसी का बेटा है और दो बेटियों का पिता है, लेकिन दोषी मुस्कान को उस समय यही दिखाई दिया, कि सौरभ उसका पति है और वही उसके प्रेम कहानी में रुकावट बन सकता है, इसलिए इसे रास्ते से ही हटा दो और उसने ऐसा ही किया। मार्च 2025 की यह घटना है, जिसने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी। पति की हत्या के बाद मुस्कान ने शव के टुकड़े कर उन्हें एक नीले ड्रम में भर दिया था। इससे पहले अदालत ने 30 सितंबर को ज़िला जज अरविंद कुमार की अदालत ने मुस्कान और साहिल को हत्या के मामले में दोषी करार दिया था।
ऐसे कई उदाहरण जिसने विश्वासघात का दिया प्रमाण
यह कोई पहली घटना नहीं है, जहां महिला ने अपने प्रेमी के लिए अपनी पति की हत्या कर दी, हाल ही हुआ केतन हत्याकांड इसका प्रमाण है, जहां सिया गोयल ने अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर पुणे स्थित लोहागढ़ किले में घूमने के इरादे से ले जाकर किले से ही ढकेल दिया और उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा दिल्ली का श्रद्धा वालकर मर्डर केस भी सबको याद ही होगा, जहां लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे प्रेमी ने अपनी ही गर्लफ्रेंड की हत्या कर उसके शव के 35 टुकड़े कर फ्रिज में रख दिया था। ऐसे और भी कई उदाहरण हैं, जिसने रिश्तों को हमेंशा शर्मिंदा तो किया ही, वहीं विश्वासघात का प्रमाण भी दिया।
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‘किसी के बच्चे को मत मारो’
मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, जिसके बाद अदालत ने सजा का ऐलान किया। इस फ़ैसले के दौरान मृतक सौरभ की मां का वो बयान भी है जिसने खूब सुर्खियां बिटोरी। उन्होंने कहा, कि ”अगर साथ नहीं रहना तो अलग हो जाओं, लेकिन किसी के बच्चे को मत मारो।” सवाल यही है, कि मुस्कान को आख़िर क्या हासिल हुआ, कुछ भी तो नहीं।
कोर्ट का फ़ैसला एक उदाहरण है
अदालत ने इस फ़ैसले के बाद देश में एक उदाहरण पेश किया है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां अपने ही अपनों का खून करने में लगे हैं। उसे देखते हुए यह फ़ैसला ऐसे जुर्म को रोकने में कारगर साबित हो सकता है। आपको किसी के साथ नहीं रहना, तो खुलकर बोलो, लेकिन हत्या मत करो, उससे कुछ हासिल नहीं होता, लेकिन जेल के दरवाज़े ज़रूर खुल जाते हैं।




