- हाईकोर्ट ने सरकार के फ़ैसले पर लगा दी थी रोक
- JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी का मामला
झारखंड में इन दिनों JPSC-JSSC परीक्षा को लेकर मामला काफ़ी गर्माता जा रहा है। उधर झारखंड हाईकार्ट के फ़ैसले के बाद छात्र आंदोलन अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। 24 दिन के छात्र आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का ऐलान किया था। इसके अलावा 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने का फ़ैसला लिया गया। यही नहीं 2014 से अबतक हुई परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए गए थे।
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सरकार के फ़ैसले पर हाईकोर्ट का रोक
सरकार के फ़ैसले के आते ही आंदोलन कर रहे छात्रों मे खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन इन परीक्षाओं को पास कर नौकरी पाने वाले युवाओं में आक्रोश पैदा हो गया और सरकार के फ़ैसले से नाराज़ यह अब अपनी नौकरी को बचाने के लिए प्रदर्शन करने लगे। इसकी गंभीरता को देखते हुए मामला हाईकोर्ट पहुंचा और हाईकोर्ट ने सरकार के फ़ैसले पर रोक लगा दी और इसके बाद नौकरी पेशा लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन आंदोलन कर रहे छात्रों में दोबारा मायूसी छा गई और इसके बाद सरकार पर भी सवाल उठने लगे, कि क्या सरकार ने छात्रों को ठगने का काम किया है।
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद छात्रों में राहत
छात्र लगातार अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। उनका आरोप है, कि JPSC-JSSC परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ और पैसे लेकर लोगों को नौकरी दी गई। इसके अलावा उनकी मांग है, कि परीक्षाओं में जो भी गड़ब़ड़ियां हुई हैं, उसकी जांच CBI करे। अब मामला इतना आगे बढ़ गया, इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट को करनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छात्रों की उम्मीद एक बार फिर जगती हुई दिखाई दे रही है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र और झारखंड सरकार समेत कई पक्षों को नोटिस जारी किया है।
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हरिशरण देवगन की याचिका पर सुनवाई
सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने JPSC, JSSC, CBI और DGP CID से जवाब मांगा है। इस याचिका में 19 अप्रैल को आयोजित JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने की मांग की गई है। साथ ही परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों में CBI जांच की मांग की गई है।
कमेटी गठित करने की मांग
साथ ही याचिका में जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या झारखंड से बाहर के किसी हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा OMR शीट की स्कैनिंग, कोडिंग, जांच और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने और परीक्षा से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की भी मांग की है। इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने सभी को नोटिस भेजा है।
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क्या कहा मुख्य न्यायाधीश ने?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा, कि यह केवल किसी पूर्व न्यायाधीश से जांच कराने का विषय नहीं है। मामले में फ़ोरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी पड़ताल की जरूरत हो सकती है। ऐसी जांच किसी सक्षम एजेंसी के माध्यम से कराई जा सकती है। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, कि क्या विवाद एक से ज़्यादा परीक्षाओं से जुड़ा है। इस पर मनन कुमार मिश्रा ने बताया, कि झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा के साथ कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा से भी जुड़ा है। इसके बाद सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश ने मामले के लिए जल्द तारीख तय करने का निर्देश दिया।




