- आसपास भी नहीं भटकी न्यूज़ीलैंड की टीम
- सैमसन 89 रन बनाकर फिर चमके
अहमदाबाद बना गवाह
अहमदाबाद भारत के T20 विश्व चैम्पियन बनने का गवाह बन चुका है, यही नहीं लगातार दूसरी बार T20 का विश्व चैम्पियन बनकर इतिहास रच दिया है। भारत पहली टीम बन गई है, जिसने तीन बार T20 का ख़िताब अपने नाम कर लिया है। फ़ाइनल मुक़ाबले में भारत ने न्यूज़ीलैंड को हराकर यह कारनामा कर दिखाया।
न्यूजीलैंड को गेंदबाजी का फ़ैसला पड़ा महंगा
फ़ाइलन मुक़ाबले में न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर गेंदबाजी तो ले ली, लेकिन जब भारतीय बल्लेबाज न्यूज़ीलैंड गेंदबाजों की धुलाई करने लगे, तो उन्हें एक समय लगा होगा, कि कहीं निर्णय ग़लत तो नहीं हो गया। भारत ने फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ 96 रन की सबसे बड़ी जीत हासिल कर ली है।

फिर छाए संजु सैमसन
फ़ाइलन में भी संजु सैमसन ने अपनी पारी से सबका दिल जीत लिया। सैमसन ने 46 गेंदों में 8 छक्कों और 5 चौकों की मदद से 89 रन बनाए। साथ ही अभिषेक शर्मा ने भी फ़ाइनल में हाथ खोलते हुए 21 गेंदों में ही 52 रन बना दिए। इसके अलावा इशान किशन ने एक बार फिर भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन करते हुए 25 गेंदों में 54 रन की पारी खेल डाली। इन तीन बल्लेबाजों की ख़तरनाक बल्लेबाजी के दम पर ही भारत 20 ओवर में 5 विकेट पर 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर पाया। आख़िर ओवर में शिवम दुबे ने भी हाथ खोलते हुए 26 रन बनाए। दुबे ने 20वें ओवर में नीशम की गेंद पर 24 रन बनाए।

सैमसन, किशन और अभिषेक ने दिखाया दम
पहले विकेट के लिए सलामी बल्लेबाज संजु सैमसन और अभिषेक शर्मा ने मात्र 7.1 ओवर में 98 रन ठोक डाले। अभिषेक शर्मा के आउट होने के बाद सैमसन ने किशन के साथ मिलकर 48 गेंदों में ही 105 रन की साझेदारी की और टीम का स्कोर 15 ओवर में ही 203 पहुंचा दिया। एक समय ऐसा लग रहा था, कि टीम 300 के पार पहुंच जाएगी, लेकिन जिम्मी नीशम के एक ही ओर में 3 विकेट गिरने से स्कोर धीमा हो गया और स्कोर 255 तक पहुंच पाया। न्यूज़ीलैंड की तरफ़ से जिम्मी नीशम को 3 विकेट मिले। बाक़ी कोई भी गेंदबाज कुछ भी ख़ास नहीं कर पाया। रचिन को 1 और हेनरी को भी एक विकेट मिला।

लक्ष्य देखकर न्यूज़ीलैंड हुई पस्त
फ़ाइनल मुक़ाबले में 256 रन का पीछा करना आसान नहीं होता और न्यूज़ीलैंड के साथ भी बिलकुल वहीं हुआ। न्यूज़ीलैंड पूरे मैच में भारतीय गेंदबाजों का सामना नहीं कर पाई और उनका लगातार अंतराल पर विकेट गिरता गया। दबाव इतना ज़्यादा था, कि न्यूज़ीलैंड एक समय 72 रन पर ही 5 विकेट गंवा चुका था और यहां से वापसी कर पाना उनके लिए चुनौती थी और इसी चुनौती में पूरी टीम 19 ओवर 159 रन पर सिमट गई और 96 रन से एक और फ़ाइनल हार गई। हम दक्षिण अफ्रीका को तो चोकर्स कहते आए हैं, लेकिन इस हार के बाद लगता है न्यूज़ीलैंड को भी चोकर्स का टैग मिल जाएगा।
साइफ़र्ट कुछ देर लड़े
बल्लेबाजी में टिम साइफ़र्ट को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज ख़ास नहीं कर पाया। साइफ़र्ट ने 26 गेंदों में 5 छक्कों की मदद से 52 रन बनाए। साथ ही कप्तान सैंटनर ने 43 रन की पारी खेली। इसके अलावा न्यूज़ीलैंड के बाक़ी बल्लेबाज संघर्ष करते ही नज़र आए।

भारतीय गेंदबाजों ने न्यूज़ीलैंड को फंसा कर रखा
फ़ाइनल मुक़ाबले हर गेंदबाज ने अपनी तरफ़ से जान लगाते हुए न्यूज़ीलैंड की बल्लेबाजों को रन नहीं बनाने दिए। न्यूज़ीलैंड पूरे मैच में संघर्ष करता नज़र आया। बुमराह ने तो कहर बरपाते हुए 4 ओवर में मात्र 15 रन देकर 4 विकेट चटकाए। इसके अलावा अक्षर पटेल की गेंदबाजी भी न्यूज़ीलैंड के समझ के परे थी। उन्होनें 3 ओवर फ़ेकें और तीनों ही ओपर में विकेट चटकाकर विपक्ष को मैच में आने ही नहीं दिया। इसके अलावा वरुण चक्रवर्ती ने भी आज अच्छी गेंदबाजी करने की कोशीश की और 1 विकेट लिया और पांड्या ने भी 1 विकेट अपने नाम किया।
फ़ील्डिंग में दिखा जोश
भारतीय टीम की फ़ील्डिंग को कैसे भूला जा सकता है। फ़ाइनल में भारत ने मैदान पर ख़ुद को झोक दिया। एक से बढ़कर एक कैच पकड़े और विपक्षी टीम को रनों के लिए तरसा दिया। फ़ील्डिंग में सबसे ज़्यादा इशान किशन छाए रहे।
किसे मिला मैन ऑफ़ द मैच और सीरीज़?
बुमराह को चमत्कारी गेंदबाजी के लिए मैन ऑफ़ द मैच चुना गया, वहीं संजु सैमसन जो इस विश्वकप में बल्लेबाजी के हीरों रहे उन्हें प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट चुना गया।



