- हाईकोर्ट ने न्यायिक हिरासत में हस्तक्षेप करने से किया इनकार
- सौरव दास व आशुतोष रांका इस समय हिरासत में है
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान न्यायिक हिरासत में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने दोनों नेताओं को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट के फैसले का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर रिवीजन कोर्ट जाने का सुझाव दिया। इसके बाद दोनों नेताओं के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछे कई सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कई सवाल उठाए, कोर्ट ने कहा, कि जब मामला SEM कोर्ट में सूचीबद्ध है, तो सीधे हाईकोर्ट आने की ज़रूरत क्यों पड़ी। इसके अलावा न्यायमूर्ति प्रसाद ने बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन और बिना अनुमति प्रतिबंधित इलाक़े में प्रदर्शन करने पर भी सवाल उठाए। दोनों नेताओं की उम्र भी पूछी गई, जिसके बाद कोर्ट ने कहा, कि सौरव दास और आशुतोष रांका जेन-ज़ी नहीं हैं। वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने याचिका वापस लेने की अनुमति दी और स्पष्ट किया, कि अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

जमानती बॉन्ड भरकर रिहा हुए थे CJP नेता
बता दें, कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट से ही गिरफ़्तार कर लिया था। इसके बाद तीनों को शांति बनाए रखने की शर्त और 50 हज़ार की जमानती बॉन्ड भरने के बाद रिहा किया गया था। इसके बाद 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका ने बॉन्ड का उल्लंघन करते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए तिरंगा लहराया थाा। इसके बाद दोनों को 5 दिन के न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया उसके बाद इनकी हिरासत को 2 दिन और बढ़ा दिया गया, जिसके ख़िलाफ़ दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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अभिजीत दीपके भी पीस बॉन्ड पर रिहा
इससे पहले कॉकरोच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी दिल्ली के कनॉट प्लेस पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने से पहले ही गिरफ़्तार कर लिया गया। बाद में उनको पीस बॉन्ड भरने के बाद रिहा किया गया। यह दूसरी बार था जब दीपके को हिरासत में लेने के बाद छोड़ा गया। इन सब घटनाक्रम को देखने के बाद CJP की आगे की राह बड़ी मुश्क़िल है। वो लगातार इलेक्शन कमीशन और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे,लेकिन इसके बाद उनको सोच समझकर क़दम उठाने होंगे, नहीं तो इस बार कड़ी क़ानूनी कार्रवाई हो सकती है।




