- कुछ दिन पहले ही गायक अरिजीत सिंह ने लिया था प्लेबैक सिंगिंग से सन्यास लेने का फ़ैसला
अरिजीत सिंह ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने प्लेबैक सिंगिंग से सन्यास लेने की घोषणा की थी। इसका मतलब यह है, कि वो अब फ़िल्मों के लिए गाना नहीं गायेंगे। यह ख़बर आते ही उनके चाहने वाले फ़ैन्स काफ़ी दुखी हुए। यह उनके फ़ैन्स के लिए चौक़ाने वाली ख़बर थी। सब सोचने लगे, कि अचानक अरिजीत सिंह को ऐसा क्या हो गया, कि उन्हें सन्यास की घोषणा करनी पड़ी।
युवाओं के दिल में बसते हैं उनके गाने
आंकड़े बताते हैं, कि अरिजीत सिंह अपने फ़िल्मी करियर में अब तक 500 से ज़्यादा गाने गा चुके हैं। उन्होंने अपने करियर में एक से एक सुपर हिट गाने गाएं हैं, कि उनके गाने आज के युवाओं के ज़ुबान पर रहते हैं। वो आज के दौर में सबसे प्रसिद्ध सिंगर्स में से एक हैं, जिनके गाने पिछले एक दशक में सबसे ज़्यादा सुने गए होंगे। पिछले 10 ले 12 साल का रिकॉर्ड देखें, तो शायद ही ऐसी कोई फ़िल्म होगी, जिसमें उनका गाया हुआ गाना ना हो। अरिजीत सिंह के लव सॉन्ग युवाओं पर सर चढ़कर बोलते हैं। ये भी कहा जाता है, कि अरिजीत सिंह का गाना हो और हिट ना हो ऐसा हो नहीं सकता।

रियेलिटी शो ‘फ़ेम गुरुकुल’ से मिली पहचान
अरिजीत सिंह को कामयाबी का सफ़र ऐसे ही नहीं मिला, उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए काफ़ी पसीने बहाए हैं। दरअसल अरिजीत सिंह को 2005 में आए रियेलिटी शो ‘फ़ेम गुरुकुल’ से पहचान मिली थी, जहां वो इस शो को जीते नहीं थे, बल्क़ि छठवें स्थान पर आए थे। योग्यता होने के बावजूद अरिजीत को कम वोटिंग की वजह से इस शो से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने दोबारा एक रियेलिटी शो ‘10 के 10 ले गए दिल’ में भाग लिया। यह एक ऐसा रियेलिटी शो था, जिसमें ‘फ़ेम गुरुकुल’ और ‘इंडियन आयडल’ के प्रतिभागियों के बीच मुक़ाबला हुआ था, जिसमें अरिजीत ने इस शो को अपने नाम किया था। 2011 में आई फ़िल्म मर्डर 2 के गाने ‘दिन संभल जा ज़रा फिर मोहब्बत करने चला है तू’ के साथ प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की। यह गाना उस समय सबकी ज़ुबान पर बोलता था, फिर क्या था अरिजीत सिंह ने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा और उसके बाद आई आशिक़ी 2, जहां से अरिजीत सिंह को एक नई शोहरत मिली।
आदमी का व्यक्तित्व बोलता है
दरअसल अरिजीत सिंह सिर्फ़ एक टेलेंट नहीं है, बल्क़ि वो एक व्यक्तित्व है। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसकी सादगी, विनम्रता, समर्पण, धैर्य और अपने काम के प्रति ईमानदारी ने लोगों के बीच अलग पहचान दिलाई, जिसे लोग अपना आइडल बनाना चाहते हैं। इस दुनिया में टेलेंट की कमी नहीं है, लेकिन जिसके पास व्यक्तित्व की कमी है, वो लंबा सफ़र तय नहीं कर पाया। टेलेंट और व्यक्तित्व जब मिलता है, तभी अरिजीत सिंह जैसे फ़नकार पैदा होते हैं। हमारे देश में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, मन्ना डे जैसे बड़े-बड़े व्यक्तित्व पैदा हुए, जिनके पास अपार टेलेंट तो था ही, लेकिन अपने व्यक्तित्व से वो आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं।

चकाचौंध से भरी फ़िल्मी दुनिया का खालीपन
हालांकि अरिजीत सिंह ने यह भी कहा है, कि वह संगीत के ज़रिए अपने फ़ैन्स से जुड़े रहेंगे। इस पोस्ट के बाद रंग-बिरंगी, चकाचौंध से भरी फ़िल्मी दुनिया में कितना खालीपन है, इसका पता चलता है। रौशनी में डूबी फ़िल्मी दुनिया में एक ख़ामोश अंधेरा भी है। शायद अरिजीत सिंह इस अंधेरे से निकलना चाहते हों। इस खालीपन को भरना चाहते हों। दरअसल फ़िल्मी दुनिया की हक़ीक़त कुछ और ही है आप जब तक चल रहे हैं, तब तक नाम-शोहरत सबकुछ मिलता है और जिस दिन चलना बंद हुए, आप गुमनामी के अंधेरे में चले जाते हैं। आपकों कोई याद भी नहीं करता। ऐसे कई उदाहरण है, जिन्होंने शुरू में तो फ़िल्मों में राज़ किया, लेकिन बाद में वों चंद पैसो के मोहताज बन गए।

टेलेंट को दिखाने के आज कई प्लेटफ़़ॉर्म मौजूद
कितने ही टेलेंट हैं हमारे देश में जो फ़िल्म प्रोडक्शन का चक्कर लगाते रह जाते हैं और उन्हें मौक़ा नहीं मिल पाता, लेकिन आज हमारे सामने इतने सारे प्लेटफ़ॉर्म्स हैं, इतने विकल्प हैं, कि जहां आप अपने टेलेंट से लोगों के दिलों तक पहुंच सकते है। ऐसे भी तमाम उदाहरण है, जिन्हें फ़िल्मों में कभी मौक़ा नहीं मिला, लेकिन फिर भी दुनिया भर में बड़े-बड़े कन्सर्ट्स के माध्यम से अपनी कला को पेश कर रहे हैं और अच्छा पैसा कमा रहे हैं। अरिजीत अब फ़िल्मों के लिए नहीं गाएंगे, लेकिन दूसरे माध्यम से वों अपना संगीत लोगों तक पहुंचाते रहेंगे। इसका अर्थ साफ़ है, कि कला के लिए अब फ़िल्मों में काम करने की ज़रूरत नहीं है, बल्क़ि अगर आपके अंदर योग्यता है और लगातार ईमानदारी से मेहनत कर रहे हैं, तो कोई भी दरवाज़ा आपके लिए खुल सकता है और आपको प्रसिद्धि दिला सकता है।
फ़िल्मों में बदतमीज़ी है
सबसे बड़ा उदाहरण लक्की अली हैं, जिन्होंने फ़िल्मों में बहुत कम गाने गाए, लेकिन उनके एल्बम आज भी घर-घर सुने जाते हैं। उनके गानों में दर्द, इमोशन और महोब्बत सब दिखता है, उनकी आवाज़ के जादू ने उन्हें लोगों के दिलों में पहुंचा दिया। उनके गाने जैसे ओ-सनम, सुनों, कभी ऐसा लगता है, गोरी तेरी आंखें कहें जैसे कितने गीत उन्होंने एल्बम के ज़रिए लोगों तक पहुंचाए। लक्की अली का ऐसा मानना है, कि ‘फ़िल्मों का स्तर काफ़ी गिर गया है, वहां सिर्फ़ हिंसा है, जिसका प्रभाव हमारे समाज में पड़ता है। यहां लालच भरा है और लोगों के साथ बदतमीज़ी की जाती है’। लक्की अली का ऐसा बयान बहुत कुछ कहता है, जबकि वो हिन्दी फ़िल्मों के जाने-माने अभिनेता महमूद के बेटे हैं। लक्की अली ने अरिजीत सिंह के इस निर्णय का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, कि ‘बस आपको अपने पर भरोसा होना चाहिए और अगर भरोसा पक्का है, तो आपको कोई मुश्क़िल रोक नहीं पाती’।

आम आदमी के लिए मुश्क़िल है दरवाज़ा खोलना
आम आदमी के लिए बॉलीवुड का दरवाज़ा खोल पाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। मानोज वाजपेयी, नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी, पंकज त्रिपाठी, जयदीप अहलावत और द ग्रेट इरफ़ान ख़ान जैसे अभिनेताओं ने अपनी योग्यता के दम पर कामयाबी हासिल की, जिन्होंने समाज में लोगों के बीच अपनी अलग छवि बनाई है। अरिजीत सिंह के फ़ैसले पर पंकज त्रिपाठी का कहा है, कि हम कलाकार है, ना की कोई फ़ैक्ट्री।

आज अरिजीत सिंह लोगों के लिए अपने फ़ैन्स के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। उन्हें महज़ 38 साल की उम्र में जितनी कामयाबी और शोहरत मिली, उसे पाने की इच्छा सभी कलाकार रखते हैं, लेकिन कितने कालाकरों के बाल सफ़ेद हो गए, लेकिन आज भी प्रोडक्शन के दरवाज़े उनके लिए नहीं खुले। यही नहीं इस बॉलीवुड में ऐसे कितने सितारे ऐसे हैं, जिनकी शुरुआत 40 साल के उम्र के बाद हुई, लेकिन आज वो कामयाब हैं। कला ऐसी चीज़ है, जिसे एक जगह बांधकर नहीं रखा जा सकता, उसे उड़ने दें, शायद वो अपनी राह खुद बनाले।
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