- जोरहट सीट से दोनों लड़ रहे हैं चुनाव
- प्रद्युत बोरदोलोई का पार्टी से जाना कांग्रेस के लिए क्षति
असम विधानसभा चुनाव की गर्मी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। बीजेपी नेता और असम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और काग्रेंस नेता गौरव गोगई की सीधी टक्कर इस चुनाव में देखी जा सकती है। दोनों पार्टी ने अपनी उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जहां जोरहट सीट से हिमंत बिस्वा सरमा के लिए गौरव गोगई चुनौती पेश करने जा रहे हैं। गौरव गोगई ने लोकसभा सीट से इस्तीफ़ा दे दिया है और अब मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस की तरफ़ से चुनाव लड़ेंगे।
असम के मुद्दे
विपक्ष ने इस बार कई मुद्दों को लेकर सरकार का घेराव किया है। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, असमिया पहचान, विकास, बाल विवाह के अलावा जुबिन गर्ग की मौत का मुद्दा इस बार असम चुनाव में प्रमुखता से उठाया जा रहा है। दूसरी तरफ़ हिमंत बिस्वा सरमा असम में घुसपैठिए (बांग्लादेशी) व एसआईआर का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं। उनका कहना है, कि ये लोग असम की जनता का हक़ मार रहे हैं।
प्रद्युत बोरदोलोई के आने से दीसपुर सीट से अतुल बोरा नाराज़
असम चुनाव से पहले कांग्रेस के सांसद रह चुके प्रद्युत बोरदोलोई का भाजपा में आना इस बात का संकेत है, कि इस बार का असम चुनाव रोमांचक और गरमा-गरमी से भ्रा हुआ है। इधर प्रद्युत बोरदोलोई के भाजपा में आने से दीसपुर के चर्चित चेहरा रह चुके अतुल बोरा का नाम काट कर प्रद्युत बोरदोलोई का नाम शामिल किया गया। नाम कटने के बाद अतुल बोरा पार्टी से नाराज़ चल रहे थे। इसी बीच कांग्रेस की मीरा बोरठाकुर गोस्वामी और अतुल बोरा के बीच मुलाक़त की चर्चा लगातार सुर्खियों में बनी रही। यह कयास लगाए गए की बोरा कांग्रेस से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के बीच में आने और समझाने के बाद असम गण परिषद (एजीपी) के सदस्य अतुल बोरा ने बोकाखाट से नामांकन कर सभी आशंकाओं पर विराम लगा दिया है।
प्रद्युत बोरदोलोई के जाने से कांग्रेस को झटका
उधर असम के बड़े चहरे प्रद्युत बोरदोलोई के आने से चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। बोरदोलोई ने असम के नगांव सीट से 2024 लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की थी और वो कई वर्षों से असम के प्रमुख चेहरा बने हुए हैं। बोरदोलोई ने लोकसभर से इस्तीफ़ा भी दे दिया है। कांग्रेस के लिए इसे बड़ा बड़ा इसलिए भी कहा जा रहा है, क्योंकि उनकी पहचान हमेंशा से ज़मीनी नेताओं की रही है। बता दें, कि वह 2015 तक तरुण गोगई की कांग्रेस सरकार में मुख्य पद पर मोर्चा संभाल चुके हैं और असम की जनता से उनका अलग लगाव और रिश्ता सा रहा है और असम की बारिकियों से वाक़िफ़ हैं। अब देखना होगा, कि कांग्रेस इसकी भरपाई कैसे करने वाली है?



