- 100 डॉलर के पार कच्चे तेल के दाम
- अमेरिका ने ईरान का प्रस्ताव ठुकराया
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब कच्चे तेल की क़ीमतों पर पड़ने लगा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज किए जानेकर दिया था, जिसके बाद अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में तेल के दाम में उछाल आया है। अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.82 डॉलर बढ़कर 106.14 डॉलर प्रति बैरल हो गया, वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 1.14 डॉलर बढ़कर 93.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का तनाव
तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम रास्ता है, जिसपर कई महीनों से तनाव चल रहा है। युद्ध शुरू होते ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बंद कर दिया था और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमले की ख़बर भी आती रही। इसके चलते पूरी दुनिया में तेल की कमी आती रही और कच्चे तेल के दाम बढ़ते रहे। अमेरिका स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को लेकर कई दावे करते रहा, लेकिन इसके बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का तनाव बरकारार है।
‘क़यामत की लड़ाई’ के लिए तैयार ईरान
ईरान ने कहा है, कि सिर्फ़ डिप्लोमेसी ही अमेरिका और इज़राइल के साथ उसके झगड़े को सुलझा सकती है। कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से खोलने के ईरान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में कहा, कि उनका देश अमेरिका के साथ “क़यामत की लड़ाई” के लिए तैयार है।
क्या था ईरान का शांति प्रस्ताव?
ईरान ने न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली में एक शांति प्रस्ताव का ऐलान किया था। यह भी कहा था, कि इसे क़तर के मीडिएटर्स के ज़रिए अमेरिकियों तक पहुंचाया गया है। ईरान ने अमेरिका को स्ट्रेट को फिर से खोलने और 7 दिन में अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए एक डील का भी ऑफ़र दिया था। इस ऑफ़र के बदले, ईरान की मांग थी, कि US ईरानी पोर्ट्स पर अपनी नेवल ब्लॉकेड हटाए, ईरानी तेल की बिक्री पर लगे बैन हटाए और एक सीज़फ़ायर करे जिसमें लेबनान भी शामिल हो।
ऑफ़र को ठुकराते हुए डोनाल्ड ट्रंंप ने क्या कहा?
इस ऑफ़र को डोनाल्ड ट्रंंप ने यह कहते हुए खारिज कर दिया, कि ईरान डील करना चाहता है, क्योंकि वह बहुत बुरी तरह हार रहा है। ट्रंंप ने कहा, कि ईरान इस ज़रूरी वॉटरवे पर एग्रीमेंट के लिए अपनी बेताबी की वजह से ज़ोर दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, कि वह भी डील करना चाहते थे, लेकिन ईरान की शर्तें उन्हें मंज़ूर नहीं थीं। डिप्लोमेसी का रास्ता खुला रखते हुए, ट्रंप ने कहा, कि उन्हें उम्मीद है कि US के नेगोशिएटर इस हफ़्ते बातचीत करेंगे।




