- अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह हुए रिहा
- पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा हमें फ़सांने के लिए लिखी गई स्क्रिप्ट
दिल्ली चुनाव में बूरी तरह हारने के बाद से आम आदमी पार्टी (आप) ग़ायब सी हो गई थी। आप पार्टी की कहीं कोई चर्चा नहीं थी। 10 साल दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल हार के बाद इस तरह गुम हुए, कि लग ही नहीं रहा था, कि वो कभी दिल्ली के सीएम भी थे। शराब घोटाले के लगे आरोप में कट्टर ईमानदार वाली उनकी छवि धूमिल हो गई और चुनाव हार का बड़ा कारण भी रही। बता दें, कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाले मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह सहित कई नेताओं को बरी कर दिया है।
इसके बाद आम आदमी पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता भाजपा सरकार पर बरस पड़े और कहा, कि यह ‘आप’ पार्टी को बदनाम करने का सबसे बड़ा षड्यंत्र भाजपा सरकार द्वारा रचा गया थाा। आज उनका झूठ सबके सामने आ गया है। मामला अब उच्च न्यायालय पहुंच गया है, अब देखना दिलचस्प होगा, कि हाई कोर्ट इस मामले में क्या फ़ैसला सुनाता है।

‘आप’ के बड़े नेता जेल तक गए
अरविंद केजरीवाल के अलावा ‘आप’ के मुख्य नेता सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह शराब घोटाले मामले में जेल तक गए। पूर्व कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन लगभग 18 महीने से ज़्यादा जेल में रहे थे, पूर्व उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री रहे मनीष सिसोदिया क़रीब 17 महीने तिहाड़ जेल में रहे, वहीं संजय सिंह 6 महने तिहाड़ जेल में रहे थे। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इससे नहीं बच पाए और ईडी व सीबीआई जांच के दौरान उन्हें भ 4 महीने से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस शर्त पर ज़मानत दे दी थी, कि वह ना तो किसी दसतख़त करेंगे, ना दफ़्तर जाएंगे और इस केस से जुड़े मामले में कोई बयान भी जारी नहीं करेंगे।
शराब घोटाले में क्या हुआ?
वर्ष 2021-22 में दिल्ली की ‘आप’ सरकार ने नई ‘आबकारी नीति’ यानी शराब नीति लागू की थी, जिससे कि शराब चोरी को ख़त्म कर शराब कारोबार को बेहतर बनाने और सरकार के राजस्व को बढ़ाने की योजना बनाई गई थी। इसके अंतर्गत शराब कारोबार को निजी हाथों में देने का फ़ैसला लिया गया। धीरे-धीरे इस नीति को लेकर सवाल उठाए जाने लगे। ऐसा कहा गया, कि इस नीति में कई ख़ामियां सामने आई हैं, जिसके बाद दिल्ली सरकार पर शराब घोटाले का आरोप लगा। यह भी कहा गया, कि इससे निजी हाथों में आए शराब कारोबारियों को फ़ायदा पहुंचाया गया है, यहां तक, कि मंत्रियों पर 100 कारोड़ रिश्वत लेने का ओराप लगा। उस समय मनीष सिसोदिया के हाथों में आबकारी विभाग भी सौंपा गया था। बढ़ते आरोपों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने वर्ष 2022 में इस नई आबकारी नीति’ को रद्द कर दिया था।
मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद मची थी हलचल
उस समय के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने शराब घोटाले की रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था, कि कंपनियों को लाइसेंस शुल्क में 144.36 करोड़ की छूट दी गई थी। उसके बाद पूरे देश में इस घोटाले की चर्चा होने लगी। इसके बाद दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस घोटाले के लिए सीबाआई जांच की मांग की थी। यही नहीं रिश्वत और सरकारी खजाने की हेरा-फेरी के लिए मनी-लॉन्ड्रिंग केस भी चलाया गया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस केस की जांच की। कहा जाता है, कि शराब घोटाले के पैसों से ‘आम आदमी पार्टी’ ने अपना दायरा मजबूत करने के लिए गोवा, गुजरात और पंजाब विधानसभा चुनाव में पैसों को खर्च किया था।
सीबीआई और ईडी की जांच के बाद
सीबीआई और ईडी मामले की जांच करते हुए सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को पूछताछ के दौरान एक-एक करके गिरफ़्तार किया। इसके अलावा ‘आप’ के 20 से ज़्यादा नेता जेल इस मामले में जेल गए थे। ‘आप’ पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के बाद 21 मार्च को गिरफ़्तार कर लिया गया था। उस दौरान लोकसभा चुनाव का प्रचार-प्रसार हो रहा था और 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव के प्रचार के लिए उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी और उसके बाद अरविंद केजरीवाल ने दोबारा 2 जून को तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया था।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने किया बरी
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पिछले दिनों आम आदमी के प्रमुख नेता अरविंद केजरीवाल के अलावा ‘आप’ के बड़े नेता पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह के अलावा 20 से ज़्यादा नेताओं को शराब घोटाले से बरी बर दिया है। कोर्ट ने माना, कि शराब घोटाले में जो सबूत पेश किए गए, वो आरोप सिद्ध करने के लिए काफ़ी नहीं है। इसके अलावा कोर्ट ने सीबीआई और ईडी की जांच के प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।हालाकिं सीबाआई और ईडी इस फ़ैसले से नाख़ुश है और यह मामला अब उच्च न्यायालय में पहुंच गया है।
बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल रोने लगे और इसका ज़िम्मेदार भाजपा को ठहराया। वहीं संजय सिंह ने कहा, कि ‘अरविंद केजरीवाल-मनीष सिसोदिया समेत आम आदमी पार्टी की छवि खराब करने के लिए ये गहरी साजिश रची गई’।



