- दो दिन चली पक्ष-विपक्ष की तीखी नोकझोंक
- अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से हुआ ख़ारिज
लोकसभा स्पीकर के ख़िलाफ़ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सदन में दो दिन तक तीखी नोकझोंक चली। पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर सीधी टकराव देखी गई। इसी बीच विपक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान हमेशा की तरह विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए स्पीकार के आसन के पास पहुंचकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए।
बता दें, कि अविश्वास प्रस्ताव ख़ारिज होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दोबारा अपनी ज़िम्मेदारी संभाली, लेकिन विपक्ष के हंगामें के बाद सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने क्या कहा?
गौरव गोगोई ने कहा, कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया है, जिस कारण उनके ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव को पेश किया गया है। उन्होंने कहा, कि सदन में राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान उनके भाषण के दौरान अध्यक्ष द्वारा बार-बार बाधित किया गया। गोगई ने यह भी कहा, कि लोकसभा अध्यक्ष के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं, इसलिए इसलिए यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं है।
रविशंकर प्रसाद ने अविश्वास प्रस्ताव को बताया“अहंकार की संतुष्टि”
सत्ता पक्ष के नेता रविशंकर प्रसाद ने अविश्वास प्रस्ताव के विरुद्ध अपनी बाती रखते हुए सीधे तौर पर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, कि स्पीकर को पद से हटाने के लिए लाया गया प्रस्ताव, सही मायने में उनके खिलाफ़ अविश्वास का नहीं, बल्कि “किसी के अहंकार की संतुष्टि” के लिए लाया गया है। साथ ही उन्होंने कहा, कि हम भी विपक्ष में रहे, लेकिन उनके कार्यों पर कभी भी सवाल नहीं उठाया और इस अविश्वास प्रस्ताव को कष्टदाई बताया।
रविशंकर ने आरोप लगाते हुए कहा, कि विपक्ष भारत के संविधान, संसद और निर्वाचन आयोग के ख़िलाफ़ टिप्पणी करने में लगा रहता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता सदन का हिस्सा है, लेकिन विपक्ष के नेता का आचरण भी उतना ही जिम्मेदार होता है। साथ ही कहा पिछले 72 वर्षों में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस केवल दो बार हुई है।

किरण रिजिजू का शेर
वहीं केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी की तुलना आख़िरी मुगल शासक से ही कर दी। साथ ही किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए मुज़्तर ख़ैराबादी का शेर भी पढ़ा।
विपक्ष के आरोप
इसी बीच कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने भी अपनी बात रखते हुए, कहा कि अध्यक्ष ने सदन में विपक्ष के नेताओं को बोलने नहीं दिया और विपक्ष की महिला सांसदों पर भी आरोप लगाए हैं। चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भी दावा किया कि उन्हें सदन में बोलने से कई बार रोका गया है।
कांग्रेस के नेता के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, कि यह प्रस्ताव लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांत से संबंधित है और देश में संसदीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए है, वहीं समाजवादी पार्टी के आनंद भदौरिया ने अविश्वास प्रस्ताव को लोकसभा की गरिमा की रक्षा बताया।

गृह मंत्री अमित शाह का विपक्ष को क़रारा जवाब
अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने आए गृह मंत्री अमित शाह ने एक-एक करके विपक्ष को जवाब देते हुए झकझोर दिया। उन्होंने इस अविश्वास प्रस्ताव के प्रति ख़ेद प्रकट करते हुए कहा, कि स्पीकर किसी राजनीति पार्टी का नहीं, बल्कि सदन का होता है। शाह ने कहा, कि भाजपा व एनडीए ने कभी भी लोकसभा अध्यक्ष के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लेकर आए, क्योंकि पार्टी को अध्यक्ष की निष्ठा पर कोई संदेह नही है। गृह मंत्री ने कहा कि सदन की कार्यवाही आपसी विश्वास और नियमों के आधार पर संचालित होती है और नियमों का पालन करना हर सदस्य की ज़िम्मेदारी होती है और उस नियम के तहत ही अपनी बात रखनी चाहिए, ना कि हंगामा करके।
गृह मंत्री ने राहुल गांधी को घेरते हुए कहा, कि राहुल गांधी सदन के महत्वपूर्ण सत्रों में भाग लेने के बाजाए विदेश में घूमने चले जाते हैं। उन्होंने एक-एक करके राहुल गांधी की यात्रा का भी विश्लेषण किया और कहा, कि बोलने के लिए सदन में मौजूद रहना पड़ता है क्योंकि सदन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की कोई सुविधा नहीं है और कहा, कि दूसरों के आचरण पर सवाल उठाने से पहले ख़ुद के आचरण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा, कि लोकसभा के नियमों के अंतर्गत अध्यक्ष के निर्णय अंतिम माने जाते हैं, लेकिन विपक्ष ने अध्यक्ष की निष्ठा पर संदेह किया है।
इसके बाद ध्वनिमत से लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की विपक्ष की मांग को ख़ारिज कर दिया गया।
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