- आम होती जा रही है भगदड़ की ख़बर
- एक सदस्य को मिलेगी नौकरी
एक बार फिर पूजा स्थल में भगदड़ मचने की ख़बर आई है। यह सुनकर बेहद दुख होता है, कि एक बार फिर आस्था के नाम लोगों ने अपनी जान गवां दी। यह एक पैटर्न सा चल पड़ा है, देश के किसी न किसी बड़े आयोजनो में, ख़ासकर तीर्थ स्थलों व मंदिरों में भगदड़ मचना आम बात हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे तमाम उदाहरण मिल जाएंगे, जहां भक्तों को अपनी जान गवांनी पड़ी।
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भक्ति कभी भीड़ नहीं हो सकती
इस तरह की घटना कोई छोटी बात नहीं है, जिसे टाल दिया जाए। इस पर हम सबको सोचने विचारने की ज़रूरत हैं। भक्ति कभी भीड़ नहीं हो सकती, अगर होती तो इस तरह की घटना नहीं होती। सच तो यह है, कि आज भक्ति एक मनोरंजन तक सीमित होता जा रहा है। बड़े-बड़े मंदिर हमारे लिए पिकनिक स्थल हो गए हैं। ईश्वर ने तो हमेंशा शांति में ही निवास किया है, किसी पंडाल में भीड़ लगना भक्ति का प्रमाण नहीं है। यह हमें समझना होगा और भक्ति व आस्था के नाम पर भीड़ इकठ्ठा करने से बचना होगा। नहीं तो भगदड़ में हम अपना ही नुकसान करते हैं।
पलभर में सब बदल गया
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में जो हुआ, वह बेहद पीड़ादायक है। यहां मची भगदड़ ने 19 बेकसूर लोगों की जान ले ली और 25 लोग घायल हुए। यह घटना महा सप्तमी के दौरान रात क़रीब 8 बजे हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान भारी बारिश होने लगी और पंडाल में भीड़ अचानक बढ़ गई और अफरा-तफरी मच गई। भीड़ बेकाबू होने से कई लोग गिर पड़े, जिससे भगदड़ पैदा हुई और लोग के ऊपर लोग चढ़ गए और पलभर में उल्लास, दुख में बदल गया।

पूछताछ के लिए पूजा आयोजकों को हिरासत में लिया
घटना किस तरह से हुई इसकी जांच जारी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, लाउडस्पीकर पर की गई एक घोषणा के बाद अचानक भीड़ बढ़ गई, जिससे भगदड़ मच गई। इस घटना की जांच के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विशेष जांच दल (SIT) गठित की है। मुख्यमंत्री ने कहा, कि CCTV फुटेज की जांच की जाएगी और लापरवाही बरतने वालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल को बंद कर दिया गया है। पुलिस ने पूजा आयोजकों, निजी सुरक्षा कर्मियों और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
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मृतकों के परिवार के एक सदस्य को मिलेगी नौकरी
मुख्यमंत्री ने मृतकों के हर परिवार को 25-25 लाख और घायलों को 5-5 लाख रुपये देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया, कि मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। सुरक्षा के नज़रिए से प्रशासन ने अधिक भीड़ जुटने वाले कुछ थीम-आधारित पूजा पंडालों को अस्थायी रूप से बंद रखने की सलाह दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मृतकों के परिजनों के प्रति शोक प्रकट करते हुए कहा, कि पश्चिम बंगाल सरकार पीड़ित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। साथ ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की और घायलों को 50-50 हज़ार रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा राष्ट्रपति मुर्मु ने सोशल मीडिया के माध्यम से मृतकों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।




