- वर्ष 2024 से अब तक अंतरिम सरकार के रूप में काम कर रही थी जमात-ए-इस्लामी
- बीएनपी पर लगाए चुनाव में धांधली के आरोप
तख़्तापलट के बाद पहली बार हुए आम चुनाव
बांग्लादेश में वर्ष 2024 में हुए तख़्तापलट के बाद पहली बार आम चुनाव कराए गए। आवामी लीग इस चुनाव का हिस्सा नहीं थी, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री छात्र आंदोलन के बाद से भारत में ही शरण लिए हुए हैं। इस चुनाव में सीधी टक्कर जमात-ए-इस्लामी गठबंधन और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से थी। इस चुनाव में 20 साल बाद बीएनपी ने पूर्ण बहुमत से सत्ता में वापसी की है।

क्यों नहीं पचा पा रही हार?
जमात-ए-इस्लामी गठबंधन और छात्र आंदोलन से पनपी नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) को जनता ने नक़ार दिया है। यह हार जमात-ए-इस्लामी और एनसीपी बिल्कुल भी पचा नहीं पा रही। इस हार को ना पचा पाने का कारण भी है। शेख हसीना की आवामी लीग को साल 2024 में छात्र आंदोलन द्वारा सत्ता से बेदख़ल करने के बाद बांग्लादेश में इनका ही राज चल रहा था। इन लोगों ने पूरे देश में क्रांतिकारी रुख अपना रखा था और हर दिन कोई ना कोई आंदोलन छिड़ा रहता था। इन लोंगों ने जैसे हिंदुओं पर अत्याचार करना शुरू किया और हत्याएं की, भारत के विरोध में पाकिस्तान से नज़दीकियां बढ़ाई, तो इनको लगा, कि यह जनता का दिल जीत लेंगे, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ। वो इसी ग़लतफ़हमी में थे, कि वो पिछले कुछ वर्षों से देश के हक़ के लिए लड़ रहे थे, उनकी आवाज़ बन रहे थे, फिर भी जनता ने उन्हें कैसे नक़ार दिया।

अल्पसंख्यक असुरक्षित थे
सच यह है, कि कट्टर सोच वाली ये पार्टियां जब से सरकार में बैठी, पूरे देश का तहस-नहस कर दिया। अर्थव्यवस्था से लेकर क़ानून व्यवस्था तक सब डगमगा गया और लोगों के बीच एक डर का माहौल पैदा हुआ। ख़ासकर हिंदू-मुस्लिम की राजनीति ने तो पूरी आगजनी ही फ़ैला दी थी। वहां के अल्पसंख्यक सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे थे। शेख हसीना के भारत में शरण लेने से भारत का लगातार विरोध करना इनकी आदत बन गई थी। जनता ने इन्हें सबक सिखाते हुए यह बता दिया, कि आपके रहने से देश का भला नहीं होने वाला। यह जीत बांग्लादेश की जनता की जीत है। देश ने बता दिया, कि हमें आपमें कोई भविष्य नहीं दिखाई देता।
हार के बाद धांधली के आरोप
इस बौख़लाहट से जमात-ए-इस्लामी पार्टी ने चुनाव में साफ़-साफ़ धांदली के आरोप लगाए हैं और कहा है, कि यह जनता के फ़ैसले के साथ खिलवाड़ है। चुनाव में पूरी तरह से हेरा-फेरी का आरोप लगाते हुए जमात ने पूरे देश में चुनाव के विरुद्ध बड़े पैमाने पर आंदोलन करने की चेतावनी जारी कर दी है। चुनाव हारने के बाद वहां हिंसा शुरू हो गई है और कुछ लोगों की मौत की और बड़े पैमाने पर लोगों के घायल होने का समाचार बांग्लादेश से मिल रहा है। चुनाव हारने के बाद तारिक़ रहमान के खिलाफ़ ये पार्टियां बड़ा आंदोलन और उनकी पार्टी को नुक़सान पहुंचा सकती हैं।

तारिक़ रहमान अपनी मां ख़ालिदा ज़िया के बाद बीएनपी का सबसे बड़ा चेहरा हैं और अगले प्रधानमंत्री के उम्मीदवार भी हैं। चुनाव के बाद और चुनाव हारने के बाद यह पार्टियां वहां लगातार हिंसा कर रही हैं। पता नहीं इन लोगों का मक़सद क्या है। हाली में पाकिस्तान से नज़दीकियों से प्रश्न उठता है, कि कहीं ये फिर से पूर्वी पाकिस्तान तो नहीं बनना चाहता। यह भी एक कारण है, कि उनका मक़सद इस चुनाव के परिणााम से शायद धूमिल होता नज़र आ रहा है। वहीं पूर्वी पाकिस्तान जिसे 1971 में भारतीय सेना की मदद से आज़ाद कर बांग्लादेश का जन्म हुआ था। उस योगदान को भूलाकर ये पार्टियां पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत का विरोध करने में लगी थी।

तारिक़ रहमान ने क्या कहा?
बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे तारिक़ रहतान ने अपनी मंशा साफ़ ज़ाहिर कर दी है। हिंसा और आंदोलन को देख उनका कहना है, कि क़़ानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाना कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा बांग्लादेश के हित में जो भी फ़ैसला लेना पड़े लिया जाएगा। हमें भविष्य की ओर देखना हैं। बांग्लादेश की सुरक्षा, विकास और पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध हमारी प्राथमिकता है।
हाल ही के चुनाव नतीजे
बीएनपी ने आम चुनाव में प्रचंड जीत कर विरोधियों को हिला दिया है। 299 सीटों की लड़ाई में बीएनपी को 212 सीट मिली, वहीं जमात को 75 सीटें ही मिली और छात्र आंदोलन वाली एनसीपी मात्र 6 सीटें ही जीत पाई। चुनाव से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
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