- अमेरिका ने टैरिफ़ को घटाकर किया 18 प्रतिशत
- डील के बाद शेयर बाज़ार में आया उछाल
अभी कुछ दिन पहले ही भारत ने यूरोप के साथ ‘मदर ऑफ़ ऑल डील्स’ के नाम से चर्चा में रही इतिहास का सबसे बड़ा मुक़्त व्यापार समझौता किया। यह ऐतिहासिक समझौता पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी रही, वहीं अमेरिका इस डील को लेकर ज़्यादा ख़ुश नहीं दिखा। उसकी तरफ़ से लगातार प्रतिक्रिया आ रही थी, कि ये डील काफ़ी निराशाजनक है और भारत व यूरोप रूस पर लगाए गए तेल प्रतिबन्ध पर हमारा साथ नहीं देना चाहते।
विदेशों में बढ़ती भारत की ताक़त
अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ़ के बाद से भारत अपने विकल्प ढूंड रहा था। भारत ने हाल ही में न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशियाई देश, यूएई, जापान, दक्षिण कोरिया, ईएफ़टीए और हाल ही में यूरोपियन संघ के 27 देशों के साथ फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट किया है। दुनिया में तेज़ी से आगे बढ़ता भारत अब विदेशी ज़मीन पर एक अलग पहचान रखता है। ऐसा देश, जिसे पूरी दुनिया एक विश्वास से देख रही है, एक ऐसा देश, जो दुनिया को प्रेरणा देने के साथ-साथ प्रेरित भी कर रहा है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण यूरोपियन संघ के साथ हुआ एफ़टीए है।

भारत का संयम
भारत अपनी निर्भरता अमेरिका से लगातार कम कर रहा था, ऐसे में अमेरिका जानता था, कि यदि भारत के साथ व्यापार नहीं किया, तो उसका जो वर्चस्व पूरी दुनिया में है, वो ख़तरे में आ जाएगा। ऐसे में डॉनल्ड ट्रंप को दोबारा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की याद आ गई है। यहां नरेंद्र मोदी की भी तारीफ़ करनी होगी। अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ़ के बावजूद भारत ने रूस से तेल लेना बंद नहीं किया। भारत लगातार अपने विकल्प तलाश रहा था, लेकिन वह अमेरिका के इस बर्ताव के आगे बिलकुल नहीं झुका। यही कारण है, कि आज भारत के साथ-साथ नरेंद्र मोदी की भी चर्चा ज़ोर-शोर से हो रही है। इस डील पर अभी हस्ताक्षर होना बाक़ी है। इस डील को ‘फ़ादर-ऑफ़-ऑल-डील्स’ का नाम दिया गया है।
क्या कहा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, कि यह डील भारत के देशवासियों की जीत है। अमेरिका के साथ हुए समझौते में सभी के हित के बारे में सोचा गया है। यह डील देश के टेक्सटाइल, ज्वेलरी और चमड़े जैसे उद्योग के लिए काफ़ी फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा, कि भारत पहले भी किसानों के हित की बात करता था और आज भी हुए समझौते में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है, कि हमारे देश की कृषि और डेयरी को भारत-अमेरिका समझौते से दूर रखा जाए।

सेब, काजू, बादाम हो सकते हैं सस्ते
टैरिफ़ घटने के बाद भारत अब खुलकर अमेरिका से ट्रेड कर सकेगा, जिसका फ़ायदा भारत को मिलेगा और रोज़गार में वृद्धि होगी। भारत अमेरिका ट्रेड डील की सूचना मिलते ही शेयर बाज़ार में उछाल आ गया। शेयर बाज़ार बजट पेश होने के बाद से ही चर्चा में रहा है। इसके अलावा आजकल सेब भारतीय बाज़ार में काफ़ी महंगे दामों में बिक रहे हैं। डील पर हस्ताक्षर होने के बाद सेब के दामों में कटौती संभव है और यह सस्ते दामों में बिकेंगे। इसके अलावा काजू, बादाम और पिस्ता जैस आइटम के दामों में भी कमी आएगी।
प्रधानमंत्री का संदेश
भारत-अमेरिका समझौते के बाद नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, कि ‘आत्मविश्वास वह शक्ति है, जिसके बल पर सब कुछ संभव है। विकसित भारत के सपने को साकार करने में देशवासियों की यही शक्ति बहुत काम आने वाली है।’ साथ ही राजग के साथ हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा, कि यह समझौता देश के हर व्यक्ति को लाभ पहुंचाएगा। उन्होंने कहा, कि यह डील अगले 25 वर्षों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा, कि इसे आमजन तक सही तरीक़े से पहुंचाया जाए। साथ ही इस सामझौते को लेकर अमेरिका ने भी ख़ुशी जताई है और इसे एक ऐतिहासिक जीत भी बताया है।
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