- बिना अनुमति मिल रही है पुलिस सुरक्षा
- ज़मानत या पैरोल पर बाहर आए नेताओं की हटाई जाए सुरक्षा
चुनाव आयोग से नाराज़ विपक्षी दल
पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले हर दिन अब नई जंग छिड़ती जा रही है। टीएमसी जहां बीजेपी पर आरोप का वार कर ही रही, वहीं दूसरी तरफ़ चुनाव आयोग की कार्यशैली से भी नाराज़ है। विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते आइ हैं। अब ख़बर आई है, कि चुनाव आयोग क बार फिर टीएमसी से नाराज़ हो गया है।
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किस बात से नाराज़ हुआ चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 36 नेताओं को मिल रही पुलिस सुरक्षा को लेकर आपत्ति जताई है। इलेक्शन कमिशन ने सुरक्षा को पक्षपातपूर्ण बताया है और राज्य के पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता को दो से तीन दिनों में निष्पक्ष समीक्षा करने का निर्देश जारी किया है।
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अनुमति के बिना सुरक्षा
चुनाव आयोग का कहना है, कि उनके अनुमति के यह सुरक्षा दी जा रही है। सूत्रों से पता चला है, कि चुनाव घोषणा से पहले 832 टीएमसी नेताओं और 144 अन्य लोगों की सुरक्षा में 2,185 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
चुनाव आयोग के निर्देश
आयोग ने साफ़ किया है, कि आपराधिक मामलों में, जमानत या पैरोल पर बाहर आए नेताओं के अलावा नियमों के विरुद्ध सुरक्षा पाने वाले नेताओं की सुरक्षा हटाई जाए। साथ ही इलेक्शन कमिशन ने लंबित गैर-ज़मानती वॉरंट को लागू करने के निर्देश दिए हैं। बंगाल पुलिस द्वारा अनुपालन रिपोर्ट न मिलने से भी आयोग नाराज़ है।
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