- 1 महीने से ऊपर पहुंचा युद्ध
- अमेरिका ने रखे ईरान के सामने 15 शर्त
थमता नहीं दिख रहा युद्ध
पश्चिम एशिया महासंग्राम को एक महीने से ऊपर का समय बीच चुका है, लेकिन युद्ध थमने के बजाए अब हर दिन और भी ख़तरनाक होता जा रहा है। ख़तरनाक सिर्फ़ इसलिए नहीं, कि एक देश दूसरे देश पर हमला कर रहे हैं, बल्कि यदि यह संघर्ष ऐसा ही चलता रहा, तो पूरी दुनिया के सामने ऊर्जा का संकट पैदा हो जाएगा, कच्चे तेल व गैस की कमी के अलावा अर्थव्यपस्था पर इसका बूरा असर पड़ने वाला है। भविष्य में आम आदमी पर इसका बूरा प्रभाव महंगाई के रूप में पड़ेगा।
युद्ध में हुए नुक़सान की भरपाई आसान नहीं
जब से युद्ध शुरू हुआ है, तभी से दुनियाभर में संकट के बादल घिरने लगे हैं, लेकिन यह जानते हुए, कि पूरे विश्व पर इसका ख़तरनाक असर पड़ रहा है और पड़ेगा, लेकिन फिर भी इज़रायल-अमेंरिका और ईरान मानने को तैयार नहीं और हमले पर हमले होते जा रहे हैं। इन हमलों में बड़े-बड़े गैस प्लांट और तेल रिफ़ाइनरी को बर्बाद कर दिया गया, जिससे से संकेत तो मिल ही गया है, कि इनकी भरपाई आसान नहीं और हो सकता है, कि इससे उभरने में वर्षो का समय लग जाए, वो भी तब, जब यह युद्ध रूक जाए, जिसके फ़िलहाल कोई आसार नहीं दिख रहे, क्योंकि कोई भी अब पीछे नहीं हटना चाहता। कुछ युद्ध स्वाभिमान की लड़ाई भी बन जाती है।
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कौन-सी शर्ते ट्रंप ने पेश की ईरान के सामने?
अमेरिका ने ईरान के सामने ऐसी शर्तें रखी, जो ईरान को शर्त कम और धमकी ज़्यादा लगी। ये कुछ ऐसी शर्ते थी, जिसे ईरान कभी नहीं मानेगा। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका सामने ही अपनी 5 शर्तें रख दी, जिससे डॉनल्ड ट्रंप बर्दाश्त नहीं कर पा रहे और ईरान के इस बर्ताव पर अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान पर ज़बरदस्त हमले करने की पूरी योजना बना रहे हैं।
अमेरिका की प्रमुख शर्तें:
1) अमेरिका ने जो सबसे पहले शर्त रखी, वो है ईरान अपने परमाणु कार्यक्रमों को पूरी तरह से बंद कर दे।
2) नतान्ज़, फ़ोर्डो और इस्फ़हान जैसे परमाणु प्लांट्स को बंद करना होगा
3) ईरान आगे कभी भी परमाणू हथियार तैयार नहीं करेगा।
4) 30 दिनों तक का युद्ध विराम।
5) अमेरिका ने कहा, कि ईरान को हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे प्रॉक्सी संगठनों को फ़ंडिंग देने पर रोक लगाने के साथ-साथ समर्थन कम करना होगा।
6) ईरान को अपनी मिसाइल क्षमता (जैसे बैलिस्टिक) को कम करना होगा।
7) स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज स्वतंत्र रूप से खोलना होगा।
8) अंतर्राष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (IAEA) ईरान के परमाणु कार्यक्रमों की निगरानी करेगी।
9) ईरान के द्वारा लगाए गए सभी अंतर्राष्ट्रीय और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना होगा।
10) ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाए, जिसकी निगरानी IAEA करेगा।
11) संयुक्त राष्ट्र के स्नैपबैक मैकेनिज़्म को समाप्त करना।
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इरान की कौन-सी पांच शर्तें अमेरिका को नामंजूर?
ईरान ने इन शर्तों को मानना तो दूर उल्टा अपनी 5 शर्तो के माध्यम से अमेरिका पर हमला बोल दिया है। पिछले कई दिनों से चल रहे इस युद्ध में ईरान के बड़े-बड़े अधिकारी मारे गए, लेकिन उसने अभी तक हमला करना नहीं छोड़ा, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप कहते है, कि ईरान में अब ज़्यादा कुछ नहीं बचा। अमेरिका के दावे ईरान के हमलों में झूठे साबित होते जा रहे हैं और उसने युद्ध को ख़त्म करने की अपनी ही शर्ते रख दी हैं, जो अमेरिका को खटक रही है:
1) ईरान ने कहा, कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर अधिकार का अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिला।
2) युद्ध में हुए नुक़सान की भरपाई की जाए।
3) ईरान पर दोबारा हमला या युद्ध न हो।
4) सभी गुटों व मोर्चों पर युद्ध ख़त्म हो।
5) हमलों और हत्याओं पर रोक लगे।
ईरान ने कहा कोई बातचीत नहीं हुई
अमेरिका राष्ट्रपति अक्सर यह कहते सुने जा रहे हैं, कि ईरान से बातचीत चल रही है और इस बातचीत कर जल्द हल निकलेगा। इसके बाद डॉनल्ड ट्रंप ने कहा, कि बातचीत के दौरान कुछ दिनों के लिए ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला नहीं किया जाएगा। इसके बाद ईरान ने ट्रंप की बातों को बेबुनियाद बताया और ऐसी किसी भी बातचीत को ख़ारिज कर दिया। उनका कहना है, कि अमेरिका से ऐसी कोई भी बातचीत अभी तक नहीं हुई है।
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