- अगले 5 वर्ष में 50,000 भारतीय कामगार जा सकेंगे इज़रायल
- एआई पर जोर और यूपीआई को मिलेगी नई राह
ख़ास है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़रायल दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह इज़रायल दौरा कई मायनों में ख़ास रहा और इसे कई चीज़ो के लिए याद किया जाएगा। जैसे इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू का तेल अवीव हवाई अड्डे पर अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ स्वंय आकर नरेंद्र मोदी का स्वागत करना। पहले 2017 और फिर 2026 में दोबारा इज़रायल का दौरा करना। यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इज़रायल के संसद में ‘स्पीकर ऑफ़ दी नेसेट मेडल’ से सम्मान और इज़रायली संसद को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। इस यात्रा की एक और रोचक बात यह है, कि वहां उनके स्वागत के लिए हिंदी में पोस्ट करना, जिससे हिंदी भाषा की बढ़ती गरिमा विश्वभर में उजागर होती है।

दोनों देशों में हुए मुख्य समझौते
भारत और इज़रायल के बीच हुए समझौते में भविष्य की नई तक़नीकों और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर ज़्यादा ध्यान दिया गया है। साथ ही रोजगार सृजन के नए रास्तों पर भी चर्चा हुई। मुख्य समझौते इस प्रकार हैं:
1) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई): एआई के विकास और उसकी क्षमता को बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है। इसका इस्तेमाल शिक्षा से लेकर कृषि को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
2) साइबर सुरक्षा: आज दुनियाभर में साइबर क्राइम चिंता का विषय बना हुआ है। इसकी रोकथाम के लिए साइबर देश में संयुक्त साइबर सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा, जिससे साइबर सुरक्षा के नई तक़नीकों और डिजिटल सुरक्षा को मजबूती प्रदान करेगा।
3) शिक्षकों और छात्रों के आदान-प्रदान: नालंदा विश्वविद्यालय और यरुशलेम के हिब्रू विश्वविद्यालय (एचयूजेआई) के बीच समझौता ज्ञापन पेश किया गया है, जिसमें दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शिक्षकों और छात्रों के आदान-प्रदान के लिए एक रूप-रेखा तैयार की जाएगी। साथ ही इस समझौते से बौद्ध अध्ययन, पुरातत्व, गणित और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे विषयों में दोनों देश साथ मिलकर काम करेंगे।
4) शिक्षा में एआई का इस्तेमाल: बदलते दौर के साथ शिक्षा क्रांति में भी नए बदलाव लोने के लिए अब शिक्षा को एआई से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से पढ़ाने के नए तरीक़े, शिक्षकों का विकास और एआई के नियम के जरिए शिक्षा का डिजिटलीकरण करना है।

5) रेस्तरां क्षेत्र में लेबर मोबिलिटी: इस समझौते के ज़रिए रेस्तरां, कैफ़े और खाने-पीने की चीजें तैयार करने और बेचने वाले वाले व्यवसाय में भर्ती की जाएगी। इसे रोजगार के लिए अहम माना जा रहा है।
6) विनिर्माण क्षेत्र (मैन्यूफ़ैक्चर इंडस्ट्री) में लेबर मोबिलिटी: इसके माध्यम से देश में रोजगार के अवसर पैदा करना है। इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कारखानों जैसे कपड़ा, कैमिकल, लकड़ी, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, रबर और फ़ूड प्रोसेसिंग में भर्तियां की जाएंगी। साथ ही दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं, कि अगले 5 वर्ष में 50,000 भारतीय कामगार इज़रायल जा सकेंगे।
7) कृषि क्षेत्र: कृषि को बढ़ावा देने और बेहतर उपज के लिए देश में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की स्थापना की जाएगी। इसके माध्यम से खेती की टेक्नोलॉजी, उपग्रह-आधारित सिंचाई, एडवांस्ड मशीनरी और पेस्ट मैनेजमेंट, जर्मप्लाज्म एक्सचेंज, प्रदर्शनी, कटाई के बाद की प्रक्रिया जैसे तक़नीक को सीखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा मछली पालन और जलकृषि पर भी दोनों देशों में समझौता हुआ है।
8) यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई): भारत जिस तेज़ी से यूपीआई का चलन बढ़ा है, उसे देखते हुए इसे बड़ा समझौता माना जा रहा है और हर तरफ़ इसकी चर्चा हो रही है। इसके माध्यम से यूपीआई को बढ़ावा मिलगा ही, बल्कि भारत और इज़रायल के बीच की आर्थिक गतिविधियां भी तेज़ होंगी।

9) सांस्कृतिक कार्यक्रम का आदान प्रदान: इस कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2026 से 2029 तक संगीत, नाटक, कला और नृत्य को मजबूती मिलेगी। साथ ही कलाकारों और विशेषज्ञों के दौरों से आपसी समझ को बढ़ावा मिलेगा।
10) रक्षा समझौता: इस यात्रा में डिफ़ेंस को लेकर भी कई समझौते किए गए हैं। इसके अंतर्गत मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और एयर डिफ़ेंस जैसे समझौते किए गए हैं, जिससे कि रक्षा का स्तर और दायरा दोनों बढ़ाकर मजबूती दी जा सके।
11) फ्री-ट्रेड-एग्रीमेंट: दोनों देशों में जल्द ही मुक्त व्यापार समझौता होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इससे दोनों देशों के व्यापार को नई राह मिल सकती है।
सभी तस्वीरों का स्त्रोत: PIB India



