इतिहास में याद रखी जाएगी 27 तारिख़ और 27 देश, अमेरिका को रास नहीं आई डील

  • इस समझौते को ‘मदर-ऑफ़-ऑल-डील्‍स’ का दिया गया नाम
  • उर्सुला वान डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्‍टा थे गणतंत्र दिवस के मेहमान

भारत ने हाल ही में यूरोपियन यूनियन के साथ ऐसा ऐतिहासिक मुक्‍त व्‍यापर समझौता किया है, जिसे ‘मदर-ऑफ़-ऑल-डील्‍स’ का नाम दिया गया है। 27 तारिख़ को 27 देशों के साथ यूरोपियन यूनियन समझौता कोई मामूली बात नहीं, वो भी तब जब पूरा विश्‍व उथल-पुथल है। एक देश दूसरे देश के साथ युद्ध कर रहे हैं और अमेरिका टैरिफ़ पर टैरिफ़ बढ़ाने की धमकी दे रहा है। ऐसे में यूरोपियन संघ के साथ मुक्‍त व्‍यापर समझौता (FTA)  भारत के साथ-साथ यूरोप के लिए भी बड़ी उपलब्‍धी है।

गणतंत्र दिवस पर पहुंचे थे दोनों मेहमान

2026 के गणतंत्र दिवस पर जो दो मेहमान भारत आए थे, उन पर पूरी दुनिया नज़र रखे हुए थी। सबको अनुमान था, कि लगता है अब कुछ बड़ा होने वाला है। ये दो मेहमान थे, यूरोपीय आयोग की अध्‍यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्‍यक्ष एंटोनियो कोस्‍टा। यूरोपीयन संघ के इन दो मेहमानों के आने से सबको ये ख़बर लग गई थी, कि जिस तरह अमेरिका अपनी मनमानी कर रहा है, उसे देखते हुए व्‍यापार और आर्थि‍क जगत में बड़े समझौते होने वाले हैं और यही हुआ। भारत ने यूरोपियन संघ के साथ इतिहास का सबसे बड़ा मुक्‍़त व्‍यापार समझौता कर डाला, जो अमेरिका को नागवार गुज़र रही है।

डॉनल्‍ड ट्रंप के इरादे ठीक नहीं

डॉनल्‍ड ट्रंप का रवैया देखते हुए यूरोप को धीरे-धीरे समझ आ रहा है, कि अमेरिका पर भरोसा जताना या निर्भर रहना अब देश हित व अर्थव्‍यवस्‍था के लिए ठीक नहीं। भारत एक बहुत बड़ा बाज़ार है, जहां अपेक्षाएं बहुत ज़्यादा है। पूरे विश्‍व में भारत की छवि एक भरोसेमंद देश के रूप में उभरकर आई है, जो लड़ाई-झगडों में नहीं बल्‍कि समाधान में विश्‍वास करता है, जो हर चुनौती का हल ढूंडने में लगा हुआ है और ऐसे में यूरोपियन यूनियन को भारत से बड़ा भरोसेमंद देश नहीं लगता, जो डॉनल्‍ड ट्रंप की रणनीतियों से पार पा सके।

क्‍या कह रहा है अमेरिका?

‘मदर-ऑफ़-ऑल-डील्‍स’ को लेकर अमेरिका का रवैया कुछ ठीक नहीं है। इस एफ़टीए को लेकर अमेरिका ने निराशा जताई है। अमेरिका ने रूस का ज़‍िक्र करते हुए कहा, कि यूरोप और भारत रूस तेल पर प्रतिबंध को लेकर अमेरिका का साथ नहीं देना चाहते, ये बेहद दुख की बात है। अमेरिका इसलिए भी निराश है, कि कई देश अब अमेरिका के रुख को देखते हुए नए विकल्‍प तलाश रहे हैं।

कई वर्ष पहले भी चली थी समझौते की बात

भारत और ईयू के बीच समझौते की बातचीत वर्ष 2007 से ही चल रही है, लेकिन 2013 में बिना किसी नतीज़े पर पहुंचे यह डील आगे नहीं बढ़ पाई। 2022 में नरेंद्र मोदी की सरकार में दोबारा मुक्‍त बाज़ार समझौता को लेकार बातचीत शुरू हुई और 2026 में आख़‍िरकार इस डील पर मुहर लग गई है। यह एफ़टीए ऐसे समय में हुई जब पूरा विश्‍व अमेरिका की टैरिफ़ से परेशान हैं और हर तरफ़ असुरक्षा जैसा माहौल बना हुआ है।

प्रधानमंत्री का सपना विकसित भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में विकसित भारत और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था वाली बात कहते आए हैं। इस समझौते पर यूरोपियन देशों ने जिस तरह भारत पर भरोसा जताया है, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है, कि विकसित भारत और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था वाली बात प्रधानमंत्री ने यूंही नही कही, बल्‍कि पूरे विश्‍वास के साथ कहा है। शायद उन्‍हें भविष्‍य का अंदाज़ा पहले से लग चुका था, इसलिए ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ पर वो हमेंशा से ज़ोर देते आ रहे हैं, जिसका लाभ अब देखने को मिल रहा है।

इन क्षेत्रों को मिलेगा FTA का लाभ

इस समझौते से कृषि, छोटे उद्योगों की राह यूरोपियन देशों में आसानी तक पहुंच पाएगी। मैन्फ़ैक्‍चरिंग, केमिकल, टेक्‍सटाइल, फ़ार्मास्‍यूटिकल्‍स (दवाएं), मरीन प्रॉडक्‍ट्स (समुंद्री उत्‍पाद), लेदर, ज्‍वेलरी और ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में लाभ मिलेगा। साथ ही आईटी सेक्‍टर को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा ग्रीन एनर्जी व साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी में मजबूती आएगी, बैकिंग की सेवाएं, खाने-पीने की चीज़ें, स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पहले से सस्‍ती हो जाएंगी। समझौते में सुरक्षा के मुद्दे को उठाया गया है। समझौते में सिक्‍योरिटी और डिफ़ेंस पार्टनरशिप की बात हुई है, जिससे आतंकवाद से निपटने व साइबर सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इस डील की मदद से महिला सशक्‍तिकरण को समर्थन मिलेगा। माना जा रहा है, कि इससे आने वाले समय में रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। बता दें, कि भारत और यूरोपीयन देशों में इस समझौते के बाद 90 प्रतिशत से ज़्यादा प्रॉडक्‍ट्स पर टैक्‍स ख़त्‍म कर दिए जाएंगे, वहीं ऑटोमोबाइल में 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत हो जाएगा, जो साल में 2.50 लाख वाहनों पर लागू होगा।

FTA को लेकर क्‍या कहा प्रधानमंत्री ने?

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा समझौता बताते हुए कहा, कि ‘आज हमारी साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है। आज 8 लाख से अधि‍क लोग यूरोपीयन देशों में रह रहे हैं और सक्रिय योगदान दे रहे हैं। हमने स्‍ट्रैटेजिक टेक्‍नोलॉज़ी, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल गवर्नेंस से लेकर डवलपमेंट पार्टनरशिप हर क्षेत्र में नए आयाम स्‍थापित किए हैं। इन्‍हीं उपलब्‍धि‍यों को लेकर इस समिट में हमने समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुंचाने वाले कई निर्णय लिए हैं। यह एफ़टीए किसानों और छोटे उद्योगों का यूरोपियन यूनियन से पहुंच आसान बनाएगा। मैन्‍यूफ़क्‍चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा। सर्विसेस सेक्‍टर के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा। उन्‍होंने कहा, कि वैश्‍विक स्‍तर पर सप्‍लाई चेन को मजबूत करेगा और निवेश में बढ़ोतरी आएगी। भारत के स्‍टूडेंट्स, वर्कर्स और प्रोफ़ेशनल्‍स के लिए यूरोपियन यूनियन में नए अवसर ख़ुलेंगे। साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी और सुरक्षा के साथ-साथ महिला सशक्‍तिकरण को मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा, कि यह समझौता आतंकवाद और साइबर क्राइम जैसी चुनौतियों से भी लड़ने में मददगार साबित होगी।’     

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