- पूर्व जनरल नरवणे की किताब है चर्चा में
- रवनीत सिंह बिट्टू को कहा ‘गद्दार दोस्त’
हंगामें से नहीं हुआ था प्रधानमंत्री का धन्यवाद प्रस्ताव
पिछले दिनों जो कुछ भी संसद में हुआ, वो सच में निंदनीय है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद प्रधानमंत्री को धन्यवाद प्रस्ताव के लिए आना था, लेकिन वो इसलिए नहीं आए, क्योंकि विपक्ष की कुछ महिलाओं ने अचानक से प्रधानमंत्री की सीट पर आके हंगामा करना शुरू कर दिया और लोकसभा अध्यक्ष को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के धन्यवाद प्रस्ताव के बिना लोकसभा सदन की कार्यवाही को रोकना पड़ा था और उनके बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पास कर दिया गया।

देश की जनता से मज़ाक
जब इतने बड़े-बड़े मंत्री, जिन्हें जनता चुनकर संसद भेजती है, कि वो उनके मसले को संसद में पेश करेंगे। जब ये नेता लोकतंत्र के मंदिर में आपस में ही लड़ने लगते हैं और मुद्दे बिना चर्चा के ख़त्म कर दिए जाते हैं, तब जनता सोचने पर मजबूर हो जाती है, कि उनके साथ धोखा हुआ है। अगर इतने बड़े नेता जब आपस में ही लड़ंगे, तब हम देश के अंदर अमन और शांति की बात कैसे करेंगे। हम कैसे एकता की अपील कर सकते हैं, जब हमारे अंदर ही एकता वाला भाव नहीं रहेगा।

लोकसभा में गुंजा ‘गद्दार’ शब्द
राहुल गांधी अपने निलंबित सांसदों के साथ प्रदर्शन करते वक़्त, जिस तरह संसद में रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ कहा, ये बड़ा ही शर्मनाक था। इससे हंगामा और भी बढ़ गया। इससे सिखों के प्रति उनकी नफ़रत खुलकर सामने आई। बदले में बिट्टू ने अपने बयान में कहा, कि राहुल गांधी हमेंशा से सिखों के ख़िलाफ़ रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी को ‘सबसे बड़ा गद्दार’ बताया। बता दें, कि रवनीत सिंह बिट्टू पहले कांग्रेस के बड़े नेता थे, जो 2014 में लुधियाना सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। वर्ष 2024 में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे।

बजट पर नहीं किसी और मुद्दे पर हुआ हंगामा
देश का आम बजट 2 फ़रवरी को संसद में पारित हुआ और संसद में इस पर चर्चा करने के बजाए विपक्ष के नेता दुसरे गंभीर मद्दों पर चर्चा करने लगे। इस पर उन्हें बोलने से मना कर दिया गया। इस पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया, कि उनकों मुद्दों पर बोलने नहीं दिया जा रहा, हमें रोका जा रहा है। चर्चा बजट पर होनी चाहिए थी, लेकिन उस पर किसी विपक्ष ने अपनी कोई राय नहीं रखी, जबकी देश के आम लोगों का यह बजट था, इसपर विपक्ष को अपने सवाल रखने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विपक्ष ने इस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।

जनरल नरवणे की किताब ‘फ़ोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ है चर्चा में
जिस मुद्दे पर संसद में हंगामा हुआ वही मुद्दा आज कल देश और संसद भवन में भारतीय सेना के पूर्व जनरल मनोज नरवणे की किताब ‘फ़ोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ चर्चे में है। राहुल गांधी ने 2020 में गलवान में चीनी और भारतीय सेनाओं में हुए झड़प पर चर्चा शुरू कर दी और इस झड़प से जुड़ी भारतीय सेना के पूर्व जनरल मनोज नरवणे की किताब ‘फ़ोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’, जो अभी प्रकाशित भी नहीं हुई, उसका हवाला देकर कहा, कि इस घटना के दौरान सेना को सही निर्देश नहीं दिए गए थे और कहा था, कि ‘आपको जो ठीक लगे वो करें’। इससे वह साबित करना चाहते हैं, कि सरकार चीन से डरती है और हमारी सेनाओं पर भी निशाना साधने की कोशीश की है।

डील को बताया धोखा
पिछले दिनों युरोपियन यूनियन के 27 देशों के साथ हुई ‘मदर ऑफ़ ऑल डील’ हो या अमेरिका के साथ हुआ ट्रेड डील। भाजपा सरकार इन ट्रेड समझौता को लेकर जहां कह रही है, कि यह ट्रेड डील्स भविष्य में अभूतपूर्व सफलता लेकर आने वाला है और यह किसान, युवा, शिक्षा, रोज़गार और देश की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इसे कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे डील नहीं जनता के साथ हुआ धोखा बता रहा है। अगर यह धोखा है, तो विपक्षी दल को इसका कारण जनता के सामने रखना चाहिए। आप बिना तथ्य के इतनी बड़ी डील को धोखा कैसे बता सकते हैं। दुनिया के बड़े-बड़े देश क्या भारत से बिना सोचे-समझे हाथ मिला रहे हैं, भला ये कैसे संभव है? सरकार के हर काम पर आप ऐसे आरोप नहीं लगा सकते।

याद आते हैं वो सिलेंडर वाले दिन
कांग्रेस भी कभी सरकार में रही, लेकिन इतनी बड़ी डील कभी नहीं हुई। यही नहीं वो दिन भी याद आता है, जब एक गैस सिलेंडर के लिए आम जनता को लंबी कतारें लगानी पड़ती थी और बुकिंग के एक महीने बाद गैस सिलेंडर घर में आता था और खाना बनता था। आज शहर छोड़ दीजिए, ग्रामीण इलाक़ों में भी हर घर में गैस की उपलब्धता और वो भी मुफ़्त। ये तो एक मुद्दा है।

अपने काम पर नहीं है नज़र
सच तो यह है, कि विपक्ष को आज जनता के मुद्दे कम और सरकार क्या कर रही है और उसमें कैसे नुस्क निकाला जाए उसमें ज़्यादा रहता है। यह जनता के साथ धोखा ही कहा जाएगा, कि आप जनता की ज़रूरतों को ना देखकर सरकार के नुस्क निकालने में लगे हैं, इसलिए की एनडीए की सरकार को कैसे हराया जाए। विपक्ष पिछले 10 वर्षों से यही काम कर रहा है। इंडी गठबंधन बनाया, लेकिन उन्हें सफ़लता नहीं मिली। नतीजा नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बने और आज भी वो निडर होकर विपक्षी पार्टियों का सामना कर रहे हैं।



