- वर्ष 2017 के बाद से यह प्रधानमंत्री का दूसरा दौरा
- नरेंद्र मोदी को ‘स्पीकर ऑफ़ दी नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया
भारत से हाथ मिलाती दुनिया
वैश्विक स्तर पर जबसे आर्थिक उथल-पुथल बढ़ी है और अमेरिका के टैरिफ़ रैवया को देखते हुए आज एक देश दूसरे देश से नज़दीकियां बढ़ा रहा है। आज विश्व में भारत एक अलग पहचान बनकर उभरा है। एक विश्वास और उम्मीद की नींव बनकर उभरा है, इसलिए आज कई विकसित देश, विकसित भारत से हाथ मिलाना चाहते हैं।

इसका उदाहरण गणतंत्र दिवस के अवसर पर यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता। हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन का भारत आना, जहां उन्हें रेड कार्पेट पर ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ से नवाज़ा गया था और दोनों देशों की दोस्ती पूरे विश्व के सामने प्रकट हुई थी। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और दक्षिण-पूर्व एशियाई जैसे देशों के साथ रिश्ते मजबूत होना और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक इज़रायल यात्रा इसका सबूत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक इज़रायल दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक इज़रायल दौरा कई मायने में ख़ास है। इसे ख़ास इस बात से भी कहा जा सकता है, कि इज़रायल के प्रधानमंत्री तेल अवीव हवाई अड्डे पर अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ स्वयं प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के स्वागत में पहुंचे, जो भारत और इज़रायल के बीच के ख़ास रिश्ते और नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को बयां करती है। किसी देश का प्रधानमंत्री जब हवाई अड्डे पर स्वयं आकर वेल्कम करे, तो यह अपने आप में बड़ी बात होती है और यह एक-दूसरे के बीच गहरे रिश्ते को उजागर करती है। इस रिश्ते में तब और भी मजबूती आई थह जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार वर्ष 2017 में इज़रायल की यात्रा की थी। 2026 में यह उनकी दुसरी यात्रा है और इस यात्रा को ऐतिहासिक बताया जा रहा है।

संसद को संबोधित करने वाले पहले प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी इज़रायली संसद को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं। यही नहीं नरेंद्र मोदी को संसद में ‘स्पीकर ऑफ़ दी नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। यह सिर्फ़ प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि भारत का भी सम्मान है। यही नहीं उनके स्वागत के लिए वहां पर हिंदी में पोस्ट किए गए थे। इससे पता चलता है, कि पिछले एक दशक में विश्वभर में हिंदी को नई पहचान मिली है। प्रधानमंत्री ने जब से विदेशी यात्राओं में जाकर हिंदी में संबोधन देना शुरू किया है, तब से हिंदी एक सम्मानित भाषा बनकर उभरी है। इससे पहले विदेश तो छोड़ दिजीए, अपने ही देश में हिंदी को सम्मान से नहीं देखा जाता था। यही नहीं हिंदी भाषा में रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।

140 करोड़ भारतवासी को समर्पित किया मेडल
संसद में संबोधन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़रायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को उनका गर्मजोशी भरे स्वागत करने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, कि नौ वर्ष पहले मुझे इज़रायल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने का सौभाग्य मिला था और 2026 में दोबारा इज़रायल की ऐतिहासिक भूमि पर क़दम रखना मेरे लिए गर्व और भावुकता भरा पल है। प्रधानमंत्री ने ‘स्पीकर ऑफ़ दी नेसेट मेडल’ के लिए स्पीकर क्नेसेट, प्रधानमंत्री नेतन्याहू और इज़रायल के लोगों के प्रति आभार प्रकट करते हुए इसे 140 करोड़ भारतवासी और भारत-इज़रायल मित्रता को समर्पित किया।

गाज़ा की शांति और आतंकवाद का ख़ातमा
प्रधानमंत्री ने शांति पर बात करते हुए गाज़ा का जिक्र किया और कहा, कि मानवता का अर्थ संघर्स करना नहीं है, बल्कि शांति है। उन्होंने ‘गाजा पीस प्लान’ की चर्चा करते हुए कहा, कि इससे शांति का रास्ता खुला है और भविष्य में भी हम सभी देशों के साथ मिलकर शांति संदेश देते रहेंगे। इसके अलावा आतंक का कड़ा विरोध करते हुए कहा, कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता से भारत के सीधे सुरक्षा हित जुड़े हैं। आतंकवाद की चर्चा करते हुए उन्होंने 26/11 मुंबई हमला और इज़रायल पर 7 अक्टूबर 2023 को हुए आतंकी हमले की निंदा की और कहा हम आतंकवाद और उनके सहयोगियों का कड़ा विरोध करते रहेंगे। इसके अलावा उन्होंने यहुदि समुदाय की चर्चा करते हुए कहा, कि भारत के यहुदी बिना डर के शांति से रहते हैं।

इस यात्रा से भारत और इज़रायल के बीच आर्थिक सहयोग, विकास, नवाचार, साझा समृद्धि, व्यापार, रक्षा सहयोग और कृषि मुख्य बिंदू रहेंगे। साथ ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी नज़रें रहने वाली हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने कहा, कि भारत जल्द दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है।
सभी तस्वीरों का स्त्रोत: PIB India


