गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय पर्व की बधाई देते हुए कहा, कि आज देश के सम्पूर्ण विकास में महिलाएं बढ़-चढ़ कर योगदान दें रहीं हैं और पंचायती संस्थाओं में महिला प्रतिनिधि का होना बढ़ती नारी शक्ति का उदाहरण है। इस संबोधन में राष्ट्रपति ने महिलाओं और देश के युवा पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, कि हमारे युवा हमारे देश के विकास यात्रा में क़दम से क़दम बढ़ा रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, कि 25 जनवरी मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है और मतदान में महिलाओं की भागीदारी हमारे गणतंत्र को और शक्तिशाली बनाता है। इस गणतंत्र दिवस में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को याद करते हुए उन्होंने कहा, कि राष्ट्र के एकीकरण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके अलावा राष्ट्रपति ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस को भी याद करते हुए बताया, कि वर्ष 2021 से नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना देश के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने विशेष रूप से देश को स्वच्छ रखने में मुख्य भूमिका निभाने वाले सफाई कर्मचारियों के साथ-साथ देशवासियों के स्वास्थ्य की रक्षा करने वाले डॉक्टर व नर्स के योगदान को सम्मान दिया। इसके अलावा राष्ट्रपति मुर्मू ने देश के प्रमुख स्तम्भ कहे जाने वाले सभी किसान भाइयों को समाज और अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया है।

विकसित भारत का ज़िक्र करते हुए उन्होंने अपने संदेश में बताया, कि 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा करने में युवा शक्ति प्रमुख भूमिका निभा रही है। यहीं कारण है, कि आज भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनती जा रही है, जिससे की देश तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के नक्शे-क़दम पर चल पड़ा है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा करते हुए कहा, कि यह आतंकवाद को सबक सिखाने वाला सटीक प्रहार था। उन्होंने तीनों सेनाओं के बहादुर जवानों को भारत माता की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान के लिए धन्यवाद किया और कहा, कि पूरे विश्व में शांति होने से ही मानवता सुरक्षित रहेगी।
अर्थव्यवस्था की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, कि विश्व में छिड़े युद्ध और अनिश्चिता के बावजूद भारत लगातार आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है। जीएसटी को लागू करने से एक राष्ट्र- एक बाज़ार की व्यवस्था क़ायम हुई है। इसके अलावा देशवासियों ने डिजिटल पेमेंट में अपना विश्वास दिखाया है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना की चर्चा करते हुए कहा, कि इस योजना में अबतक 57 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं।
राष्ट्र के नाम इस संबोधन में राष्ट्रपति ने पर्यावरण पर ज़ोर देते हुए कहा, कि पर्यावरण संरक्षण आज हम सबके लिए एक महत्वपूर्ण विषय है और प्रकृति को साथ लेकर चलना भारत की हमेशा से परंपरा रही है।
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