- शुरुआती दौर में पुलिस ने बताया ख़ुदकुशी का मामला
- पोस्टमार्टम के बाद खेल में आया नया मोड़
चुनाव में महिला सशक्तिकरण के नाम पर वोट तो ले लिया जाता है, महिलाओं के अकाउंट में पैसे भेजकर उनका विश्वास तो जीत लिया जाता है, लेकिन महिला सुरक्षा की गैरेंटी कौन लेगा? कौन घर-घर घोषणा पत्र लेकर वोट मांगने जाएगा, जिसमें बेटियों की हिफ़ाज़त की बात लिखी होगी? लेकिन आज के दौर में महिला, वोट की गिनती बढ़ाने और चुनाव जीतने की गैरेंटी बन गई हैं।
प्रशासन पर खड़े होते गहरे सवाल
बिहार के पटना में जिस तरह नीट की तैयारी कर रही एक बेटी के साथ हॉस्टल में दरिंदगी की गई और उसे मौत के घाट उतार दिया गया, उसने बिहार पुलिस और प्रशासन पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जंगल राज़ को ख़त्म करने की जो चर्चा हमेंशा से बिहार में होती आ रही है, अगर उस लक्ष्य तक पहुंचना है, तो इसमें सभी को मिलकर ज़िम्मा उठाना होगा। अगर पुलिस और प्रशासन ऐसे ही लापरवाही के साथ काम करेगी, जैसा उस 16 साल की छात्रा के केस में पुलिस ने साफ़ लापरवाही की है, तो बिहार का जंगलराज कभी ख़त्म नहीं होगा। सरकार को इसपर सख़्त क़दम उठाने होंगे।
लापरवाह पुलिस ने बताया ख़ुदकुशी का मामला
नीट की तैयारी कर रही छात्रा पटना के चित्रगुप्त नगर में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी, जहां 6 जनवरी की सुबह वह अपने कमरे में अचेत अवस्था में पाई गई। उसे अफ़रा-तफ़री में अस्पताल पहुंचाया जाता है, लेकिन पुलिस को ख़बर होते हुए भी वह मदद के लिए अस्पताल नहीं पहुंची। छात्रा की हालत इतनी गंभीर थी, कि उसे एक के बाद एक अस्पताल में रेफ़र किया गया। तीन अस्पतालों में छात्रा का इलाज़ चलने के बाद 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और इसे ख़ुदकुशी का खेल बताया।
कौन है गुनहगार?
आख़िर पुलिस क्या छिपाना चाहती थी, वो किसके इशारों पर काम कर रही थी या उसकी कोई दिलचस्पी ही नहीं थी इस केस में? मामले को देखते हुए ये भी कहा जा सकता है, कि पुलिस को सबकुछ पता था और अंजान बनने का नाटक चल रहा था। सवाल तो कई हैं, लेकिन गुत्थी अभी सुलझी नहीं हैं। ख़ैर बड़ी आसानी से पुलिस ने रिपोर्ट जारी कर इसे ख़ुदकुशी का मामला बता दिया। यह भी नहीं सोचा, कि उस बेटी के मां-बाप पर क्या बीत रही होगी, जिन्होंने अपनी बेटी के लिए कितने सपने संजोए होंगे। उस बेटी ने नीट की तैयारी करते वक़्त अपने भविष्य को लेकर बहुत कुछ सोचा होगा, लेकिन अब कुछ भी नहीं रहा।
इसलिए उठ जाता है भरोसा
पुलिस को जनता के हिफ़ाज़त के लिए रखा जाता है और भर्ती के समय जनता की रक्षा की शपथ ली जाती है। लेकिन पुलिस में भर्ती होना आज महज एक रोज़गार का मुद्दा रह गया है। हमें कैसे भी सरकारी नौकरी चाहिए और जीवन सुरक्षित हो जाए और समाज में एक ओहदा हो जाए जहां हम समाज में सर उठाकर चल सकें। हम पुलिस में तो भर्ती हो जाते हैं, लेकिन हमने उसके बुनियादी ढांचे को कभी समझना नहीं चाहा, कि हमें जनता की सेवा के लिए रखा गया है। देश में आज बड़ी-बड़ी सुरक्षा एजेंसियां बनाई गई हैं, ताक़ि देश की जनता को सुरक्षित रखा जा सके और क्राइम करने से पहले लोग डरें, कि इसके बाद क्या होगा? मगर सरकार द्वारा सुरक्षा को लेकर और ख़ासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नए-नए कानून तो पारित किए गए, लेकिन फिर भी बिना डर के लोग घटना को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस मामले को दबाने में लगी रहती है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मामले में आया नया मोड़
छात्रा के साथ जिस कमरे में यह घटना हुई, उसे पुलिस ने जांच करने की भी दिलचस्पी नहीं दिखाई, ना उस हॉस्टल पर कुछ कार्रवाई की गई, ना उसके मालिक़ पर। वो इसी तरह चलता रहा, ताक़ि सबूत को ख़त्म किया जा सके। यहां तक, कि छात्रा के कपड़े भी माता-पिता ने ही लाकर पुलिस को जमा किए थे, जिसपर शुक्राणु होने के सबूत मिलें हैं। मामले ने तब नया मोड़ लिया जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ दुष्कर्म का ख़ुलासा हुआ। उसके बाद कपड़ों को फ़ॉरेन्सिक टेस्ट के लिए भेजा गया, नहीं तो पुलिस ने तो चुप्पी साध ली थी। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए इस केस से जुड़े कुछ पुलिस कर्मियों को सेस्पेंड कर दिया, लेकिन इस काम में इतनी देरी क्यों हुई, यह भी एक जांच का विषय है।
बिहार के गृह मंत्री ने लगाई फ़टकार
मामले की गंभीरता और लापरवाही को देखते हुए बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने अफ़सरों को फ़टकार के बाद छात्रा को इंसाफ़ दिलाने के लिए स्पेशल टीम गठित की हैं। इसके बाद से मामले की जांच में तेज़ी आई है और हॉस्टल के सीसीटीवी फ़ुटेज को देखने के बाद हॉस्टल के मालिक़ के अलावा 6 लोगों का ब्लड सैंपल फ़ॉरेन्सिक टेस्टे के लिए भेजा गया है। साथ ही परिवार के 5 सदस्यों के भी सैंपल लिए गए हैं। फ़टकार मिलने के बाद कार्रवाई में तज़ी आ गई है, लेकिन शुरुआत में जो ढिलापन दिखाया गया वो कई सावल तो छोड़ता ही, बल्कि यह भी दर्शाता है, कि क्या क़ानून कुछ ताक़तवर लोगों के हिसाब से चलता है? ख़ैर जो भी हो, हमें उम्मीद है, कि जांच निष्पक्षता के साथ की जाएगी और छात्रा व उसके माता-पिता को इंसाफ़ ज़रूर मिलेगा। देखना होगा, कि यह गुत्थी कब तक सुलझती है।
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