- चाइना के रोबोडॉग को बता दिया अपना
- गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने ख़राब की देश की छवि
वाहवाही के चक्कर ले डूबा
एआई इम्पैक्ट समिट में एक तरफ़ भारत को एआई हब बनाने की चर्चा समिट में हो रही थी और वहीं दुसरी तरफ़ एआई इम्पैक्ट समिट में अपना स्टॉल लगाने वाले गलगोटिया यूनिवर्सिटी कुछ और ही कांड करने में लगे थे। इतना बड़ा एआई समिट, जिसमें दुनियाभर से टेक दिग्गजों ने शिरकत की, विश्वभर से प्रतिभागी आए हुए थे, वहां अपनी वाहवाही के लिए देश की फ़जीहत करना बड़े शर्म की बात है।

चाइना के रोबोडॉग को बताया अपना
एआई इम्पैक्ट समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तरफ़ से स्टॉल में एक रोबोट डॉग को लाया गया था और इस स्टॉल का संचालन गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर नेहा सिंह कर रही थी और इस रोबोट डॉग के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, कि इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी में तैयार किया गया है। बाद में जब यह बात धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर फ़ैलने लगी, तब सच्चाई सामने आई, कि यह तो चाइना में तैयार किया गया युनिट्री GO2 रोबोडॉग है, जिसे 2 से 6 लाख रुपये तक ख़रीदा जा सकता है। यही नहीं प्रोफ़ेसर ने यह भी बताया, कि भारत में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ऐसी पहली यूनिवर्सिटी, जो एआई पर क़रीब 350 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। अरे मैडम बोलने से पहले सोच लेती, कि क्या बोल रही हैं? सोचिए विश्व मंच पर आकर इतना बड़ा झूठ बोलना किसी को शोभा देता है क्या? इससे एक देश महज हंसी का पात्र बनकर रह जाता है।

पलटू राम बना गलगोटिया यूनिवर्सिटी
इतना बड़ा झूठ बोलने के बाद प्रोफ़ेसर नेहा सिंह बाद में अपने ही बयान से पलट गई और कहा, कि हम इसका दावा नहीं करते हैं। थोड़ा समझने में ग़लती हो गई। इसके बाद यूनिवर्सिटी का बयान जारी किया गया, कि हमने यह रोबोडॉग नहीं बनाया है और ना ही इस बात का दावा करते हैं। गलगोटिया ने यहां तक कह दिया, कि यह उनके ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है। वाह साहब समिट में हिस्सा लेने से पहले आपको नहीं मालूम था, कि हम चाइना का रोबोडॉग लेके जा रहे हैं और ये भी नहीं सोचा, कि अगर पता चला तो क्या होगा? आपने क्या बनाया है, वो बताइए, 350 करोड़ का निवेश कहां करने वाले हैं? ऐसा काम करने के बाद बोलते हैं, कि इससे विद्यार्थियों का मनोबल कम होगा। पहले क्यों नहीं सोचा, कि हमारे विद्यार्थी टूट जाएंगे। नहीं, आपकों डर है, कि कहीं तकनीक के नाम पर तो हम झूठ बोलकर एडमिशन करा लेते हैं, कही वो आना बंद ना हो जाए?

सरकार से भी पूछे जाने चाहिए सवाल
इस झूठ से गलगोटिया यूनिवर्सिटी की पोल तो खुल ही गई, लेकिन आज विश्व में इस घटना की चर्चा लगातार हो रही है और भारत देश की छवि भी ख़राब हुई है। कुछ कृत्यों के लिए माफ़ी नहीं होती और ये उस कृत्य में से एक है। इससे सरकार पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और होना भी लाज़मी है। सरकार ने चीन के रोबोडॉग को कैसे भारत एआई इम्पैक्ट में शामिल करने की इजाज़त दे दी। इस एआई समिट की तैयारी एक दिन में तो हुई नहीं होगी। इसके लिए कई महीनों से योजनाएं तैयार की जा रही होंगी। रजिस्ट्रेशन किए गए होंगे। तो क्या सरकार की यह ज़िम्मेदारी नहीं होनी चाहिए थी, कि वो जो भी स्टॉल लगाए जाने वाले हैं, उनके प्रॉडक्ट्स की पूरी जांच करे, उनकी गुणवत्ता की जांच करे। वो पता लगाए ये उनके द्वारा ही तैयार किया गया है कि नहीं, जिस पर सरकार निवेश करने की सोच रही है।

इतने बड़े मंच पर जहां विश्वभर के टेक दिग्गज भारत में एआई को लेकर अपनी योजना के साथ-साथ निवेश की तैयारी कर रहे हैं और भारत जहां ख़ुद को एआई ग्लोबल हब बनाने की बात कर रहा हो, तो ऐसे मंच पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी वाली ग़लती तो माफ़ी के लायक नहीं है और हम ऐसे तो एआई ग्लोबल हब नहीं बन पाएंगे। ये विकसित भारत और आत्म निर्भर भारत की परिभाषा तो नहीं हो सकती और गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने इस परिभाषा को धूमिल करने का काम किया है। उम्मीद है, कि सरकार इससे सबक लेगी और भविष्य में ऐसे प्राइवेट यूनिवर्सिटी को एंट्री देने से पहले विचार-विमर्श करेगी।

शिक्षा का व्यापार करते प्राइवेट इंस्टीट्यूट
इस घटना के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी का स्टॉल ख़ाली करवा दिया गया, जिसके वो हक़दार थे। इस तरह की बेशर्मी के लिए ऐसी यूनिवर्सिटी को बंद करवा देना चाहिए, जो एडमिशन के समय विज्ञापन के ज़रिए झूठ के बड़े-बड़े दावे करती हैं। एडमिशन लेने आए छात्र और माता-पिता को इन रंगीन पन्नों वाले विज्ञापनों से मन मोहने की कोशीश की जाती है, ताक़ि फ़ैसिलिटी के नाम पर पैसा लेकर अपना व्यापार चलाया जा सके। भारत में ऐसे कितने ही प्राइवेट कॉलेज और इंस्टीट्यूट हैं, जो बड़े-बड़े दावे करते रहते हैं, कि हमारे यहां बैंक की तैयारी किजिए, आईआईटी पढ़िए, नीट करिए हमारे पास बेहतर से बेहतर सुविधा है, फ़ैकल्टी है यहां तक की मनी रिटर्न के दावे किए जाते हैं। सच यह है, कि ये प्राइवेट कॉलेज व इंस्टीट्यूट शिक्षा की आड़ में महज व्यापार कर रहे हैं और इनके चंगुल में फ़ंसते है इस देश के आम लोग, जो पैसा जोड़-जोड़ के इन इंस्टीट्यूट्स में दाख़िला लेते हैं और उनके साथ मजाक किया जाता है।
Unitree GO2 की तस्वीर: Unitree.com
AI इम्पैक्ट समिट की तस्वरी: PIB India



