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ज्ञानेश कुमार के ख़‍िलाफ़ विपक्ष का प्रदर्शन तेज, फॉर्म-6 और SIR को लेकर उठे गंभीर सवाल

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्‍तीफ़े की मांग कर रहा है विपक्षी खेमा। उधर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है, कि निर्वाचन आयोग के फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को अदालत ने मंजूरी नहीं दी है।
  • विपक्ष का प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार दें इस्‍तीफ़ा
  • फॉर्म-6 मामले में सुप्रीम कोर्ट ने किया नोटिस जारी

पूरे देश में विपक्ष ने चीफ इलेक्‍शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के ख़‍िलाफ़ आंदोलन छेड़ दिया है। विपक्ष का मानना है, कि CEC ज्ञानेश कुमार ने चुनाव में कथि‍त गड़बड़ी की है और लोकतंत्र को खत्‍म करने का काम किया है। विपक्षी दल जिस तरह से लगातार बड़े चुनाव हार रहा है, उसे ध्‍यान में रखते हुए वो पहले से चुनाव की निस्‍पक्षता पर सवाल खड़े करता रहा है। कभी इलेक्‍शन कमीशन, तो कभी EVM की गड़बड़ी के चलते चुनाव हारने की बात करते रहे हैं।

SIR के ख़‍िलाफ़ विपक्ष का मोर्चा

इस बार ज्ञानेश कुमार पर बड़े आरोप लगाए गए हैं, जिसमें वोटर लिस्‍ट में हेर-फेर करने का मुद्दा बड़े पैमाने पर छाया हुआ है। दरअसल विपक्षी खेमा हमेंशा से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के ख़‍िलाफ़ रहा है। विपक्ष का मानना है, कि SIR के चलते बड़े पैमाने पर यानी लाखों की संख्‍या में वोटर लिस्‍ट से नाम काटे गए और विपक्षी दल इसका ज़‍िम्‍मेदार ज्ञानेश कुमार को मान रही है।

चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहें हैं सवाल

इसके अलावा जो मुद्दा उठा, जिसने पूरे देश को आकर्षि‍त किया, वो है चुनाव आयुक्‍तों के आपसी मतभेद। आरोप है, कि CEC ज्ञानेश कुमार ने अन्‍य दो आयुक्‍त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के सुझावों को दरकिनार करते हुए, खुद से ही निर्णय लिए। मीडिया से ख़बर बाहर आई, कि आयुक्‍त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी ने चुनाव प्रक्रिया जैसे रजिस्‍ट्रेशन (फॉर्म-6), डिजिटल प्रणालियों में हुए बदलाव को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन उन आपत्तियों पर ध्‍यान दिए बिना ज्ञानेश कुमार ने अपने फैसले सुनाए। इस ख़बर के सामने आते ही विपक्ष ने पूरी तरह से ज्ञानेश कुमार के ख़‍िलाफ़ आंदोलन छेड़ दिया है औ उनकी मांगे हैं, कि ज्ञानेश तुरंत अपने पद से इस्‍तीफ़ा दें।

फॉर्म-6 का विरोध, मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

फॉर्म-6 को लेकर भी देश में विवाद छिड़ा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, विपक्ष का मानना है, कि ज्ञानेश कुमार ने ग़ैरक़ानूनी ढंग से फॉर्म-6 में बड़े बदलाव किए, जिससे कि भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में इसका फ़ायदा मिल सके। फॉर्म-6 का मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा है। इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ किया, कि इलेक्‍शन कमीशन के फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को अदालत ने मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने इस मामले में बदलाव से जुड़े दस्तावेज मंगाए हैं, जिससे पता चल सके, कि ये बदलाव आख़‍िर कैसे हुए और किसने किए।

कोर्ट ने फॉर्म-6 में बदलाव की मंजूरी नहीं दी

मामला मतदाता सूची के (SIR) से जुड़ा है। जनहित याचिका में फॉर्म-6 में आवेदक के पूर्वजों और पिछले SIR से जुड़ी जानकारी मांगने पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही याचिका में इलेक्‍शन कमीशन के सॉफ्टवेयर में बदलाव का भी आरोप लगाया गया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किया है। इलेक्‍शन कमीशन ने पहले कहा था, कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 के बिहार SIR मामले में फॉर्म-6 के घोषणा पत्र को मंजूरी दी थी, लेकिन फॉर्म-6 का मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है, कि कोर्ट ने फॉर्म-6 में बदलाव की मंजूरी नहीं दी है।

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