- दुनियाभर से टेक्नोलॉजी के दिग्गज हुए शामिल
- एआई के बेहतर प्रयोग पर जोर
विकसित भारत की ओर बढ़ते क़दम
पिछले एक महीने में इस देश में विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत बनने के कई मॉडल देखे जा सकते हैं। सबसे पहले गणतंत्र दिवस के आवसर पर भारत का यूरोपियन युनियन के 27 देशों के साथ फ्री-ट्रेड-एग्रीमेंट (मुक्त-व्यापार समझौता) हुआ, जिसे ‘मदर ऑफ़-ऑल डील्स’ का नाम दिया गया।

इसके तुरंत बाद 2 फ़रवरी को संसद में आम बजट पेश हुआ, वों भी विश्व भर में चल रही ऊथल-पुथल को देखते हुए तैयार किया गया, जिसमें हमारा देश दूसरे देशों पर निर्भर ना रहे बल्कि, कैसे आत्मनिर्भर बने इस पर संसद में बजट को पारित किया गया। उसके ठीक बाद भारत-अमेरिका ट्रेड डील और टैरिफ़ की चर्चा पूरे देश में हुई, जो विकसित भारत के लिए काफ़ी अहम है।

AI इम्पैक्ट समिट 2026
अब देश की राजधानी दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट 16 से 20 फ़रवरी तक आयोजित किया गया। ये दुनिया का चौथा एआई समिट है। इससे पहले यह समिट फ्रांस, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन में आयोजित हो चुका है। यह भारत के लिए गर्व का क्षण रहा, क्योंकि भारत को टेक्नोलॉजी में पीछे समझा जाता था, वो अब भविष्य के एआई की बात कर रहा है। यह गर्व की बात इसलिए भी है, क्योंकि यह समिट भारत जैसे विकासशील देश में हो रहा है।

एआई समिट का संदेश
इस एआई समिट का संदेश था, ‘सर्वजन हिताय- सर्वजन सुखाय। इस संदेश से ही समझा जा सकता है, कि भारत इस एआई तकनीक से भविष्य में सभी का कल्याण और हित दोनों को देख रहा है। इस समिट में गुगल के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन, माइक्रोसॉफ़्ट के को-फ़ाउंडर बिल गेट्स, जियो-स्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर, माइक्रोसॉफ़्ट के प्रेसिडेंट व वाइसचेयर ब्रैड स्मिथ, मेटा के चीफ़ एआइ्र ऑफ़िसर अलेक्जेंडर वैंग, एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई और मुकेश अंबानी जैसी बड़ी-बड़ी शख़्सियत शामिल थे।

प्रधानमंत्री ने बताई मानव (M.A.N.A.V) की नई परिभाषा
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आने वाले एआई युग के लिए मानव (M.A.N.A.V) को परिभाषित करते हुए बताया, कि M मतलब मोरल व एथिकल सिस्टम यानी एआई में नैतिकता हो, A मतलब अकाउंटेबल गवर्नेंस यानी उत्तरदायित्व, N से नेशनल सॉवरेन्टी यानी राष्ट्रीय संप्रभुता, A यानी एक्सेसिबल व इंक्लूसिव, जिसका अर्थ है सुलभ व समावेशी और आख़िर में उन्होंने V का मतलब वैलिड एंड लेजिटीमेट बताया यानी एआई क़ानून के अंतर्गत होनी चाहिए।

भारत के पास प्रतिभाएं और उर्जा दोनों मौजूद
इस दौरान मोदी ने कहा, कि भारत को एआई में भविष्य दिखता है, भय नहीं। उन्होंने कहा, कि आज भारत के पास योग्यता भी है, उर्जा भी है और नीति भी है, जो भारत में एआई के लिए बहुत ज़रूरी है। उन्होंने वहां मौजूद सभी देशों के प्रतिनिधित्व को संबोधन करते हुए कहा, कि भारत बहुत बड़ा देश है। यहां लोकतंत्र है और प्रतिभाएं हैं, इसलिए भारत जैसे विकासशील देश में एआई सफ़लता की नई सीढ़ी चढ़ने के लिए तैयार है और यह एआई समिट इसका प्रमाण है। नरेंद्र मोदी ने भारत को एआई हब बनाने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की।

गूगल बना रहा है भारत में एआई हब
बता दें, कि गूगल विशाखापट्टनम में दुनिया का सबसे बड़ा एआई हब बना रही है, जिसमें वह क़रीब 15 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश कर रही है।है। इससे एआई के क्षेत्र में नई क्रांति तो आएगी ही, बल्कि इस क्षेत्र में नई प्रतिभाओं का जन्म होगा और रोज़गार सृजन भी होगा। इसके अलावा भारत एआई मिशन के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
टाटा ग्रुप और ओपन एआई मिलकर करेंगे काम
टाटा ग्रुप की टीसीएस ने ओपन एआई से साझेदारी की है, जिसके अंतर्गत टीसीएस देश में 100 मेगावॉट का एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगा, जो भारत में एआई मिशन को पूरा करने में मुख्य भूमिका निभाएगा।
तस्वीर का स्त्रोत: PIB India



